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12 लाख की आबादी, 5 हज़ार KM की दूरी… फिर भी क्यों PM मोदी मॉरीशस को दे रहे हैं इतना महत्व? पढ़िए पूरी कहानी, जिसमें भावनाएं भी हैं और रणनीति भी

12 लाख की आबादी, 5 हज़ार KM की दूरी… फिर भी क्यों PM मोदी मॉरीशस को दे रहे हैं इतना महत्व? पढ़िए पूरी कहानी, जिसमें भावनाएं भी हैं और रणनीति भी

जब दुनिया की बड़ी ताकतें हिंद महासागर को अपने प्रभाव का केंद्र बना रही हैं, तब भारत अपने पुराने दोस्तों को भूला नहीं है। ऐसा ही एक दोस्त है — मॉरीशस। आबादी भले ही सिर्फ 12 लाख हो, लेकिन यह छोटा सा द्वीप राष्ट्र भारत के लिए रणनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से बेहद अहम है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार मॉरीशस के साथ रिश्ते मजबूत करने में लगे हुए हैं। 25 जून को पीएम मोदी ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम से फोन पर बातचीत की। इस कॉल के पीछे सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि हिंद महासागर में भारत की “महासागर नीति” को नई धार देने की सोच थी। पीएम मोदी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर जानकारी देते हुए लिखा, “मुझे अपने मित्र प्रधानमंत्री डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम से बात करके खुशी हुई। हमने भारत-मॉरीशस रणनीतिक साझेदारी और क्षेत्रीय विकास को और मजबूत करने पर विचारों का आदान-प्रदान किया।” भारत पहले “सागर” (Security and Growth for All in the Region) नीति पर काम कर रहा था, लेकिन अब उसने इसे और विस्तार देते हुए “विजन महासागर” का रूप दे दिया है। यह नीति सिर्फ समुद्री सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आर्थिक हित, भूराजनैतिक रणनीति, और चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करना जैसे अहम पहलू भी शामिल हैं।
हिंद महासागर में भारत का भरोसेमंद साथी, मॉरीशस की भौगोलिक स्थिति हिंद महासागर में भारत के प्रभाव को संतुलित करने में मदद करती है। 48% हिंदू आबादी, यहां भारतवंशी बड़ी संख्या में रहते हैं, जो सांस्कृतिक और भावनात्मक जुड़ाव को मज़बूत करते हैं। व्यापारिक और रणनीतिक सहयोगी, भारत ने मॉरीशस को कोरोना काल में वैक्सीन दी, तेल रिसाव संकट में सहायता की और लगातार आर्थिक मदद भी की। मार्च 2024 में जब प्रधानमंत्री मोदी मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस समारोह में पहुंचे, तो उन्हें मॉरीशस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाज़ा गया। यह किसी भारतीय नेता को पहली बार मिला। एक तरफ ये सम्मान राजनयिक संबंधों का प्रतीक था, तो दूसरी ओर यह बताता है कि भारत को मॉरीशस की दोस्ती कितनी अनमोल लगती है। भारत ने 1948 में ही, मॉरीशस की आज़ादी से पहले ही, उससे राजनयिक संबंध बना लिए थे। एक ऐसा जुड़ाव, जो संकट के समय और गहरा हो जाता है। चाहे वह कोरोना काल हो या 2020 में तेल रिसाव का संकट, भारत मॉरीशस के साथ हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहा। भारत ने 2023-24 में 778 मिलियन डॉलर का सामान मॉरीशस को एक्सपोर्ट किया। मॉरीशस से भारत को 73 मिलियन डॉलर का आयात हुआ। कुल व्यापार 851 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया — जो 2005-06 में सिर्फ 206 मिलियन डॉलर था। पीएम मोदी का मॉरीशस प्रेम सिर्फ भूराजनीतिक रणनीति नहीं, बल्कि एक भावनात्मक पुल भी है — भाषा, संस्कृति, इतिहास और खून के रिश्ते का पुल। जब एक छोटा देश भारत के लिए इतना विश्वास रखता है, तो भारत भी उसे उतना ही मान देता है। मॉरीशस एक छोटा देश हो सकता है, लेकिन उसके साथ भारत का रिश्ता बहुत बड़ा है — दिल से भी और नीति से भी। जब भारत महासागर की लहरों पर अपना झंडा फहराने की रणनीति पर काम कर रहा है, तब ऐसे विश्वसनीय सहयोगी उसकी सबसे बड़ी ताकत बनते हैं।

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