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अजरबैजान-आर्मेनिया विवाद: भारत का दोस्त बनाम पाकिस्तान का साथी, 33 साल की दुश्मनी खत्म कराएंगे ट्रंप, जानें योजना का रहस्य

अजरबैजान-आर्मेनिया विवाद: भारत का दोस्त बनाम पाकिस्तान का साथी, 33 साल की दुश्मनी खत्म कराएंगे ट्रंप, जानें योजना का रहस्य

33 सालों से चले आ रहे अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच तनाव को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में यह शांति समझौता संभव होने जा रहा है। मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2025 में अबू धाबी में हुई गुप्त बातचीत के बाद वॉशिंगटन में एक आशय पत्र (Letter of Intent) पर हस्ताक्षर होंगे, जो भविष्य में पूर्ण शांति समझौते का मार्ग प्रशस्त करेगा। यह ट्रंप के लिए एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि हो सकती है, खासकर जब रूस-यूक्रेन और इजरायल-हमास संघर्ष में उन्हें सफलता नहीं मिली।

आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच विवाद का मुख्य कारण नागोर्नो-कराबाख क्षेत्र है। यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अजरबैजान का हिस्सा माना जाता है, लेकिन 1993 के युद्ध के बाद यह आर्मेनियाई बलों के नियंत्रण में आ गया। सोवियत संघ के विघटन के बाद यह क्षेत्र एक जटिल संघर्ष का केंद्र बन गया। 2016, 2020 और 2023 में हुई सैन्य झड़पों ने इस तनाव को और बढ़ाया। 2020 के छह सप्ताह के युद्ध और 2023 के सैन्य अभियान में अजरबैजान ने निर्णायक बढ़त हासिल की। 2024 में नागोर्नो-कराबाख प्रशासन को भंग कर दिया गया, जिससे अजरबैजान का नियंत्रण और मजबूत हुआ।

मार्च 2025 में दोनों देशों ने शांति समझौते के मसौदे पर सहमति जताई थी, लेकिन कुछ मुद्दों पर मतभेद बने रहे। अजरबैजान की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  1. संवैधानिक बदलाव: अजरबैजान चाहता है कि आर्मेनिया अपने संविधान से ‘नागोर्नो-कराबाख’ का उल्लेख हटाए, जिसके लिए आर्मेनिया को जनमत संग्रह कराना होगा। यह आर्मेनिया के लिए राजनीतिक और सामाजिक रूप से जटिल हो सकता है।
  2. ज़ांगेज़ुर कॉरिडोर: अजरबैजान एक कॉरिडोर की मांग कर रहा है जो उसे उसके एनक्लेव नक्चीवन और फिर तुर्किए से जोड़े। यह कॉरिडोर आर्मेनिया के क्षेत्र से होकर गुजरेगा, जिस पर सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण है।
    इन मुद्दों पर पूर्ण सहमति बनाना कठिन हो सकता है, लेकिन आशय पत्र पर हस्ताक्षर एक सकारात्मक कदम है।

इस शांति प्रक्रिया में भारत और पाकिस्तान की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। भारत ने हमेशा आर्मेनिया के साथ मजबूत संबंध बनाए रखे हैं, खासकर रक्षा क्षेत्र में। हाल ही में भारत ने आर्मेनिया को पिनाका रॉकेट लॉन्चर और रडार सिस्टम की आपूर्ति की है। दूसरी ओर, अजरबैजान पाकिस्तान का करीबी सहयोगी है, और दोनों देश संयुक्त सैन्य अभ्यास करते रहे हैं। पाकिस्तान ने आर्मेनिया को कभी राजनयिक मान्यता नहीं दी।

हालांकि भारत इस प्रक्रिया में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं है, लेकिन एक स्थिर कॉकस क्षेत्र भारत के रणनीतिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र ईरान, मध्य एशिया और यूरोप के साथ भारत की कनेक्टिविटी योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

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