मुख्य सामग्री पर जाएं
ब्रेकिंग न्यूज़
तरुण तेजपाल को बड़ा झटका! यौन उत्पीड़न केस में हाईकोर्ट ने ठहराया दोषी भगवंत सरकार कैबिनेट ने ‘पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) विधेयक-2026’ सहित कई जनहित के कार्यों को दी मंजूरी ‘क्या हमारी कीमत कीड़े-मकौड़ों से भी कम है?’ झारखंड के आंदोलनकारी छात्रों का फूटा गुस्सा किसी का कान फटा, किसी का कंधा खिसका’—एअर इंडिया फ्लाइट के यात्रियों ने सुनाई दहला देने वाली आपबीती हवा में हड़कंप! टर्बुलेंस में फंसी एअर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट, कई यात्री घायल पटना में बनेगा PM मोदी का मंदिर, बिहार किन्नर कल्याण बोर्ड की बैठक में बड़ा फैसला CM योगी का बड़ा लक्ष्य, इस बार 5 करोड़ घरों पर फहराएगा तिरंगा भगवा वेश में प्रदर्शन पड़ा भारी! राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद के खिलाफ केस दर्ज उमर खालिद की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को हाई कोर्ट का नोटिस SCO समिट के लिए पीएम मोदी को न्योता भेजने की तैयारी में पाकिस्तान, क्या इस्लामाबाद जाएंगे प्रधानमंत्री?

“चीन की नई खोज: प्लास्टिक कचरे से तैयार हो रहा पेट्रोल, जानिए कैसे काम करता है पूरा सिस्टम”

“चीन की नई खोज: प्लास्टिक कचरे से तैयार हो रहा पेट्रोल, जानिए कैसे काम करता है पूरा सिस्टम”

बीजिंग। प्लास्टिक कचरा आज पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौती बन चुका है। लेकिन चीन ने इस समस्या को अवसर में बदलने की दिशा में एक बड़ी पहल की है। यहां वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक विकसित की है, जिसके ज़रिए प्लास्टिक वेस्ट को प्रोसेस करके सीधे पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन में बदला जा रहा है।

इस प्रक्रिया को पायरोलीसिस (Pyrolysis) कहा जाता है। इसमें प्लास्टिक के कचरे को 300 से 500 डिग्री सेल्सियस तापमान पर बिना ऑक्सीजन के गरम किया जाता है। इससे प्लास्टिक के लंबे-लंबे अणु टूटकर छोटे हाइड्रोकार्बन में बदल जाते हैं। इन्हीं को आगे रिफाइनिंग के जरिए पेट्रोल, डीजल और गैस के रूप में बदला जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की तकनीक न केवल बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण को कम करेगी, बल्कि ईंधन के नए स्रोत भी उपलब्ध कराएगी।

इससे नदियों और समुद्र में जाने वाला कचरा कम होगा।

पारंपरिक तेल पर निर्भरता घटेगी।

यह सस्टेनेबल डेवलपमेंट की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।

हालांकि एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इस टेक्नोलॉजी को बड़े पैमाने पर लागू करना आसान नहीं है। लागत अधिक होने के साथ-साथ ऊर्जा की खपत भी ज़्यादा रहती है। इसके अलावा, यदि प्रोसेस को सही ढंग से नियंत्रित नहीं किया गया तो प्रदूषण का खतरा बना रह सकता है।

चीन की कई इंडस्ट्रीज और रिसर्च इंस्टीट्यूट इस दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। लक्ष्य है कि अगले कुछ सालों में इस तकनीक को कॉमर्शियल स्तर पर लागू किया जा सके, ताकि प्लास्टिक कचरे को समस्या नहीं बल्कि ऊर्जा का भरोसेमंद साधन बनाया जा सके।

Share This
अगला लेख → अमेरिका के तट पर दिखी दुर्लभ नारंगी शार्क, तस्वीरें हुईं वाय…

टिप्पणी करें

Your email address will not be published. Required fields are marked *

बाज़ार
सेंसेक्स 78,499 -456 (-0.58%)
निफ्टी 24,571 -65 (-0.26%)
मौसम
26°C
Patchy rain nearby
💧 89% 💨 4 km/h
Dehradun