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“HC जज की आपत्तिजनक टिप्पणी पर चंद्रचूड़ का खुलासा: “मुस्लिम इलाका कहा पाकिस्तान, तुरंत उठाया कदम”

“HC जज की आपत्तिजनक टिप्पणी पर चंद्रचूड़ का खुलासा: “मुस्लिम इलाका कहा पाकिस्तान, तुरंत उठाया कदम”

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि कर्नाटक हाईकोर्ट के एक जज ने अपने टिप्पणी के दौरान एक मुस्लिम बाहुल्य इलाके को “पाकिस्तान” कहकर संबोधित किया था। यह बात उन्हें नागवार गुजरी और उन्होंने तत्काल इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया था।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने यह खुलासा हाल ही में एक कार्यक्रम में किया, जहां वे न्यायपालिका में जिम्मेदारी और संवेदनशीलता पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि अदालत में जज की कही गई हर बात का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। इसीलिए भाषा और शब्दों का चयन बेहद सोच-समझकर करना चाहिए।

पूर्व CJI का कहना था कि न्यायिक प्रक्रिया में पक्षकारों की गरिमा और संवेदनशीलता की रक्षा करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब देश की अदालत से निकलने वाले शब्द आम जनता तक जाते हैं तो वे समाज के लिए मिसाल बनते हैं। ऐसे में किसी भी समुदाय विशेष के संदर्भ में आपत्तिजनक या असंवेदनशील टिप्पणी न्याय की मूल भावना और संविधान की आत्मा के खिलाफ है।

इस घटना के जिक्र के दौरान उन्होंने साफ कहा कि जज चाहे किसी भी स्तर के हों, उन्हें मर्यादा का हमेशा ध्यान रखना पड़ता है। उन्होंने याद दिलाया कि भारतीय संविधान की नींव ही समानता और सामाजिक न्याय पर आधारित है। अगर न्यायपालिका से ही इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान सामने आएंगे तो जनता का विश्वास कमजोर होगा।

इस खुलासे ने न्यायपालिका की कार्यप्रणाली और जजों की भाषा के इस्तेमाल को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जस्टिस चंद्रचूड़ की यह बात न्यायपालिका के अंदर आत्ममंथन की जरूरत को रेखांकित करती है। विशेषकर ऐसे समय में जब समाज में नफरत और ध्रुवीकरण तेजी से बढ़ रहा है, अदालत से आने वाले हर शब्द का असर और भी गहरा हो जाता है।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने न्यायपालिका की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि अदालतें केवल कानून लागू करने की संस्था नहीं हैं, बल्कि वे नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा की भी जिम्मेदारी निभाती हैं।

कर्नाटक हाईकोर्ट के जिस जज का जिक्र हुआ, उनका नाम भले ही सामने नहीं लाया गया, लेकिन इस बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि सुप्रीम कोर्ट के उच्चतम स्तर पर भी ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया जाता है और तत्काल हस्तक्षेप किया जाता है।

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