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युवाओं में बढ़ रही आंखों की बीमारियां, जानें कारण और बचाव के टिप्स l

युवाओं में बढ़ रही आंखों की बीमारियां, जानें कारण और बचाव के टिप्स l

युवाओं में आंखों से जुड़ी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो चिंता का विषय बनता जा रहा है। डिजिटल डिवाइस के अत्यधिक उपयोग, खराब खानपान, नींद की कमी और शारीरिक सक्रियता कम होने से आंखों की समस्याएं खासतौर से युवाओं में आम हो रही हैं। अगर इन समस्याओं को समय रहते न समझा गया और इलाज न किया गया, तो भविष्य में दृष्टि खोने का खतरा बढ़ सकता है।

शार्प साईट आई हॉस्पिटल्स के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. कमल बी कपूर के मुताबिक, अब युवाओं में डिजिटल आई स्ट्रेन, आंखों का सूखापन, धुंधले दिखने, सिरदर्द और नजदीक की वस्तुएं ठीक से न दिखना (मायोपिया) जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। पहले ये परेशानियां बड़ी उम्र में होती थीं, लेकिन अब छोटे बच्चे भी इनसे ग्रसित मिल रहे हैं।

डिजिटल आई स्ट्रेन मुख्य रूप से अत्यधिक स्क्रीन टाइम, मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट की लगातार निगाह बनाए रखने से होती है, जिससे आंखों की मसल्स थक जाती हैं और आंसू कम बनने लगते हैं। इसके कारण जलन, लालिमा और आंखों का सूखापन होता है। नींद कम होना और खराब आहार भी इन समस्याओं को बढ़ाते हैं।

प्रमुख आंखों की समस्याएं और बचाव
डिजिटल आई स्ट्रेन: हर 20 मिनट के उपयोग के बाद 20 सेकंड तक 20 फीट दूर की वस्तु देखें।

आंखों का सूखापन: आंसुओं की कमी को पूरा करने के लिए कृत्रिम आंसू का उपयोग और कंप्यूटर स्क्रीन को आंखों से उचित दूरी पर रखें।

मायोपिया (नजदीकी दृष्टि की समस्या): समय-समय पर आंखों की जांच कराएं और आवश्यकतानुसार चश्मा पहनें।

धुंधला दिखना और सिरदर्द: गुनगुने पानी से आंखें धोना और उचित प्रकाश व्यवस्था जरूरी है।

सामान्य देखभाल: विटामिन A, C, E और ओमेगा-3 से भरपूर आहार लें, पर्याप्त नींद लें, और तनाव कम करें।

डॉ. कपूर कहते हैं, “युवा वर्ग को अपनी आंखों की देखभाल को प्राथमिकता देनी होगी ताकि भविष्य की गंभीर नेत्र समस्याओं से बचा जा सके। नियमित जांच और संतुलित जीवनशैली जरूरी है।”

आंखों की इन्हीं बीमारियों से समय रहते बचाव और उपचार से निश्छल दृष्टि बनी रहती है और जीवन में गुणवत्ता बनी रहती है।

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