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लखनऊ में बड़ा खुलासा: रेप का झूठा केस कराने वाली लड़की को 3 साल की सजा, दीपक गुप्ता बरी

लखनऊ में बड़ा खुलासा: रेप का झूठा केस कराने वाली लड़की को 3 साल की सजा, दीपक गुप्ता बरी

लखनऊ में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें रेप और एससी-एसटी एक्ट के आरोप झेल रहे दीपक गुप्ता को आखिरकार राहत मिली है और उल्टा शिकायतकर्ता ही दोषी पाई गई है। मोहनलालगंज के रहने वाले दीपक गुप्ता पर उनकी पड़ोस में रहने वाली दलित समाज की युवती रिंकी ने 3 जून 2025 को गंभीर आरोप लगाए थे। रिंकी का आरोप था कि वह पिछले पांच साल से दीपक के साथ रिलेशनशिप में थी और शादी का वादा करके दीपक ने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। लेकिन दीपक ने शादी किसी और लड़की से कर ली, जिससे नाराज होकर उसने उसके खिलाफ रेप और एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करवाया।

दीपक के खिलाफ दर्ज हुए इस मामले ने उसकी पारिवारिक जिंदगी, समाज में सम्मान और उसकी मानसिक स्थिति पर गहरा असर डाला। लेकिन शुरुआत से ही यह मामला शक के घेरे में रहा क्योंकि रिंकी ने शिकायत के समय मेडिकल जांच करवाने से मना कर दिया था। कोर्ट ने जब उसे तलब किया और जांच आगे बढ़ी, तो रिंकी की कहानी खुद ही उलझती चली गई। पुलिस जांच और आरोप पत्र के आधार पर सामने आया कि जिस दिन के बारे में रिंकी ने दुष्कर्म का आरोप लगाया, उस दिन ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं थी।

जांच में यह भी साफ हुआ कि दीपक की शादी होने से रिंकी नाराज थी और उसने गुस्से में उसे सबक सिखाने के लिए फर्जी केस दर्ज करवाया था। कोर्ट ने माना कि रिंकी की मंशा दीपक की शादीशुदा जिंदगी को खराब करने और उसे जेल भिजवाने की थी। इस पूरे मामले में रिंकी के आरोप बेबुनियाद और झूठे साबित हुए।

विशेष अदालत ने फैसला सुनाते हुए रिंकी को 3 साल की सजा और 30 हजार रुपये के जुर्माने की सजा दी है। कोर्ट ने आदेश दिया कि जुर्माने की आधी राशि दीपक गुप्ता को मुआवजे के रूप में दी जाए। साथ ही, अगर इस मामले में रिंकी को किसी प्रकार की राहत राशि दी गई है तो उसे तुरंत वापस लेने के निर्देश भी दिए गए हैं।

विशेष लोक अभियोजक अरविंद मिश्रा ने बताया कि यह मामला उन दुर्लभ मामलों में से एक है, जिसमें कोर्ट ने झूठा रेप और एससी-एसटी एक्ट का केस दर्ज कराने के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि ऐसे फैसले समाज में गलत मंशा से केस दर्ज कराने वालों के लिए एक बड़ी चेतावनी हैं।

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