नए प्रदेश अध्यक्ष पर मंथन तेज: लखनऊ में संघ–बीजेपी की सीक्रेट मीटिंगें
उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर हलचल से भर गई है। पिछले दस दिनों में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच हुई लगातार बैठकों को राजनीतिक गलियारों में बड़े बदलावों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। खास तौर पर उत्तर प्रदेश बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर चर्चाएं सबसे अधिक तेज हैं।
बीएल संतोष की लखनऊ यात्रा ने इन अटकलों को और गहरा दिया है। बताया जाता है कि वह संगठन में संभावित बदलावों से जुड़ी फीडबैक लेकर आए थे। लखनऊ के एक होटल में संघ के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उनकी पहली बैठक हुई, जिसके तुरंत बाद दूसरी महत्वपूर्ण बैठक मुख्यमंत्री आवास में संपन्न हुई। इस समन्वय बैठक में योगी आदित्यनाथ, बीएल संतोष, धर्मपाल सिंह, केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक और भूपेंद्र चौधरी मौजूद थे।
हालांकि आधिकारिक तौर पर कहा गया कि यह सामान्य समन्वय बैठक थी, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इसमें नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर चर्चा हुई। संगठन की तैयारियाँ भी लगभग पूरी मानी जा रही हैं, क्योंकि हाल ही में 14 नए जिला अध्यक्षों की नियुक्तियों के बाद 80 में से 70 जिलों में बीजेपी ने अपने अध्यक्ष तय कर लिए हैं।
सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वतंत्र देव सिंह (ओबीसी चेहरा) और दिनेश शर्मा (ब्राह्मण चेहरा) में से किसी एक को अध्यक्ष बनते देखना पसंद करेंगे। लेकिन केंद्रीय नेतृत्व की पसंद कुछ अलग बताई जा रही है। संभावित नामों की सूची में धर्मपाल सिंह, बाबूराम निषाद और निषाद समाज से आने वाली पूर्व केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति भी शामिल हैं। कहा जा रहा है कि इन नामों पर सहमति बनाने की कोशिश इसी बैठक में हुई।
आरएसएस अधिकारियों के साथ हुई बैठक में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले के मुद्दों पर भी जमीनी स्तर से फीडबैक लिया गया। विशेष रूप से SIR कार्रवाई को लेकर विधायकों और सांसदों की निष्क्रियता पर गंभीर चर्चा हुई। संघ का मानना है कि जनप्रतिनिधि इसे केवल चुनाव आयोग की कार्रवाई समझकर दूर बैठे हैं, जबकि जनता को मदद की आवश्यकता है।
बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हिंदुत्व आधारित एजेंडे पर भी विस्तार से बात हुई। इसमें हर जिले में संदिग्ध घुसपैठियों के खिलाफ डिटेंशन सेंटर, राम मंदिर से जुड़े धर्म ध्वजा कार्यक्रम, और दलित–पिछड़ा वर्ग में बीजेपी की राजनीतिक पहुँच बढ़ाने की रणनीतियाँ शामिल थीं। इससे पहले अयोध्या में धर्म ध्वजा समारोह के दौरान मोहन भागवत और योगी आदित्यनाथ की मुलाकात भी हुई थी, जो लगभग आधे घंटे चली, हालांकि उसका विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया।
इन बैठकों के सिलसिले ने यूपी की राजनीति में बड़ा संदेश दिया है—बीजेपी संगठन में बदलाव तय है, और यह बदलाव आने वाले चुनावी समीकरणों पर गहरा असर डाल सकता है।