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डिप्टी सीएम बनीं सुनेत्रा पवार, लेकिन सत्ता की चाबी फडणवीस के हाथ? सामना का बड़ा आरोप

डिप्टी सीएम बनीं सुनेत्रा पवार, लेकिन सत्ता की चाबी फडणवीस के हाथ? सामना का बड़ा आरोप

महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार के निधन के बाद उठा सियासी तूफान अभी थमता नजर नहीं आ रहा है। इसी बीच शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के मुखपत्र सामना में प्रकाशित एक संपादकीय ने राज्य की राजनीति को और गरमा दिया है। इसमें सुनेत्रा पवार को महाराष्ट्र का उपमुख्यमंत्री बनाए जाने के पीछे बीजेपी नेतृत्व की भूमिका को लेकर गंभीर और चौंकाने वाले दावे किए गए हैं।

सामना के अनुसार, अजित पवार के निधन के महज तीन दिन बाद सुनेत्रा पवार का उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेना कई सवाल खड़े करता है। अखबार का दावा है कि इस फैसले की जानकारी न तो एनसीपी (शरद पवार गुट) के अध्यक्ष शरद पवार, न ही कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले, और न ही पवार परिवार के किसी अन्य सदस्य को थी। यहां तक कहा गया कि खुद सुनेत्रा पवार की ओर से भी बारामती से मुंबई रवाना होने का कोई पूर्व संकेत नहीं मिला था।

संपादकीय में आरोप लगाया गया है कि बीजेपी नहीं चाहती कि एनसीपी के दोनों गुट एकजुट हों। इसके साथ ही एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल पर भी पार्टी की एकता में बाधा डालने का आरोप लगाया गया है। सामना का कहना है कि अजित पवार के निधन के बाद पार्टी के भीतर महत्वाकांक्षाएं तेज हो गईं और उपमुख्यमंत्री पद को लेकर होड़ शुरू हो गई।

अखबार में यह भी दावा किया गया कि सुनेत्रा पवार को आगे इसलिए किया गया ताकि पार्टी की कमान प्रफुल्ल पटेल के हाथ में न जाए। हालांकि संपादकीय में यह भी कहा गया है कि भले ही सुनेत्रा पवार को पार्टी की ‘पतवार’ सौंप दी गई हो, लेकिन सत्ता का असली नियंत्रण अब भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथ में है। शिवसेना (यूबीटी) का आरोप है कि सुनेत्रा पवार और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना, दोनों का राजनीतिक अस्तित्व काफी हद तक फडणवीस की कृपा पर निर्भर है।

संपादकीय में सुनेत्रा पवार को लेकर यह उम्मीद भी जताई गई है कि उनका उपमुख्यमंत्री पद केवल औपचारिक न बनकर रह जाए और वह ‘गूंगी गुड़िया’ साबित न हों, बल्कि स्वतंत्र और प्रभावी ढंग से काम करें।

इसके अलावा, सामना ने शपथ ग्रहण के समय को लेकर वैचारिक सवाल भी उठाए हैं। लेख में कहा गया है कि खुद को ‘सनातनी सोच’ से जोड़ने वाली बीजेपी के साथ गठबंधन में रहते हुए, पति के निधन के बाद अंतिम संस्कार की सभी रस्में पूरी होने से पहले सुनेत्रा पवार का शपथ लेना हिंदुत्व की परंपराओं से मेल नहीं खाता।

गौरतलब है कि सुनेत्रा पवार ने शनिवार को महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। वहीं शरद पवार ने भी सार्वजनिक रूप से यह कहा था कि उन्हें इस शपथ ग्रहण की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी। इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ पवार परिवार के भीतर, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में भी नई खींचतान को जन्म दे दिया है।

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