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‘आधुनिक चाणक्य-चंद्रगुप्त’ क्यों कहलाते हैं मोदी और शाह? जानिए पूरी कहानी

‘आधुनिक चाणक्य-चंद्रगुप्त’ क्यों कहलाते हैं मोदी और शाह? जानिए पूरी कहानी

भारतीय राजनीति में कई बड़ी जोड़ियां देखने को मिली हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की जोड़ी को सबसे मजबूत और प्रभावशाली राजनीतिक साझेदारियों में गिना जाता है। गुजरात की राजनीति से शुरू हुई यह दोस्ती आज देश की सत्ता के शीर्ष तक पहुंच चुकी है। दोनों नेताओं के बीच का भरोसा, राजनीतिक समझ और रणनीतिक तालमेल अक्सर चर्चा का विषय बना रहता है। यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में इन्हें आधुनिक दौर का ‘चाणक्य और चंद्रगुप्त’ भी कहा जाता है।

एक इंटरव्यू में अमित शाह ने बताया था कि उनकी और नरेंद्र मोदी की पहली मुलाकात 1982 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की एक बैठक के दौरान हुई थी। उस समय मोदी संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे, जबकि अमित शाह एक युवा कार्यकर्ता के रूप में राजनीति में अपनी पहचान बना रहे थे। शाह के मुताबिक, नरेंद्र मोदी युवाओं को संघ के उद्देश्यों और विचारधारा के बारे में बेहद प्रेरणादायक तरीके से समझाते थे। उनकी कार्यशैली अलग थी और वे हर काम को बड़े उद्देश्य के साथ जोड़कर करते थे।

अमित शाह ने बताया कि अहमदाबाद में आयोजित एक बड़े कार्यक्रम में मोदी ने बेहद बारीकी से योजना बनाई थी। उस कार्यक्रम में करीब 1000 से 1200 युवा शामिल हुए थे। मोदी की कार्यशैली और संवाद का युवाओं पर इतना गहरा असर पड़ा कि उनमें से कई आगे चलकर संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और भाजपा से जुड़ गए। शाह के अनुसार, यही विशेषता नरेंद्र मोदी को अन्य नेताओं से अलग बनाती है।

गुजरात में संगठनात्मक काम के दौरान दोनों नेताओं के बीच नजदीकियां बढ़ीं। जब नरेंद्र मोदी अहमदाबाद में जिला प्रचारक बने, तब अमित शाह लगातार उनके संपर्क में रहे। शाह की रणनीतिक सोच, बूथ मैनेजमेंट की समझ और काम के प्रति जुनून ने मोदी को काफी प्रभावित किया। कहा जाता है कि अमित शाह किसी भी काम को पूरा किए बिना चैन से नहीं बैठते थे और यही उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।

गुजरात बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला ने भी एक इंटरव्यू में बताया था कि एक दिन नरेंद्र मोदी एक युवा कार्यकर्ता को लेकर पार्टी कार्यालय पहुंचे और कहा कि इस युवक को पार्टी में काम दिया जाए। वह युवक अमित शाह थे। इसके बाद अमित शाह की सक्रिय राजनीतिक यात्रा शुरू हुई और उन्होंने संगठन में तेजी से अपनी पहचान बनाई।

1991 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी गांधीनगर सीट से चुनाव लड़ रहे थे। उस चुनाव की जिम्मेदारी नरेंद्र मोदी के पास थी। उसी दौरान अमित शाह ने भरोसा जताते हुए कहा था कि आडवाणी को प्रचार के लिए बार-बार आने की जरूरत नहीं पड़ेगी और उनकी जीत तय है। मोदी-शाह की रणनीति सफल रही और भाजपा ने चुनाव में जीत हासिल की।

दोनों नेताओं की दोस्ती सिर्फ राजनीतिक सफलता तक सीमित नहीं रही, बल्कि कठिन समय में भी दोनों एक-दूसरे के साथ मजबूती से खड़े दिखाई दिए। जब नरेंद्र मोदी को गुजरात की राजनीति से दूर किया गया, तब कई नेताओं ने उनसे दूरी बना ली थी, लेकिन अमित शाह उनके साथ खड़े रहे। वहीं, सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में जब अमित शाह को गुजरात से बाहर रहने का आदेश मिला, तब नरेंद्र मोदी ने उनका खुलकर समर्थन किया और हमेशा उन्हें निर्दोष बताया।

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा होती रही है कि अमित शाह ने बहुत पहले ही नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने की भविष्यवाणी कर दी थी। कहा जाता है कि गुजरात में संगठन विस्तार के दौरान शाह ने मोदी से कहा था कि एक दिन वे देश के प्रधानमंत्री बनेंगे। बाद में यह भविष्यवाणी सच साबित हुई और 2014 में नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने।

राजनीतिक विश्लेषक मोदी और शाह की जोड़ी की तुलना अक्सर चाणक्य और चंद्रगुप्त मौर्य से करते हैं। इतिहास में चाणक्य को महान रणनीतिकार और चंद्रगुप्त को शक्तिशाली शासक माना जाता है। उसी तरह आधुनिक भारतीय राजनीति में नरेंद्र मोदी को नेतृत्व और विजन का चेहरा माना जाता है, जबकि अमित शाह को उस विजन को जमीन पर उतारने वाला रणनीतिकार कहा जाता है। चुनावी गणित, बूथ मैनेजमेंट और माइक्रो प्लानिंग में शाह की पकड़ को भाजपा की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है।

नरेंद्र मोदी और अमित शाह की इस राजनीतिक यात्रा और दोस्ती को बड़े पर्दे पर भी दिखाया जा चुका है। ‘PM Narendra Modi’ नाम की फिल्म में अभिनेता विवेक ओबेरॉय ने प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका निभाई थी। फिल्म में उनके संघर्ष, राजनीतिक सफर और अमित शाह के साथ उनकी मजबूत दोस्ती को भी दर्शाया गया था।

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