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जेट फ्यूल महंगा, हवाई यात्रा पर बढ़ सकता है खर्च; सरकार लाई नई प्राइस स्टेबलाइजेशन स्कीम

जेट फ्यूल महंगा, हवाई यात्रा पर बढ़ सकता है खर्च; सरकार लाई नई प्राइस स्टेबलाइजेशन स्कीम

देश में विमान यात्रियों को जल्द ही महंगी हवाई यात्रा का सामना करना पड़ सकता है। सरकार द्वारा एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों को लेकर नई व्यवस्था लागू किए जाने और जेट फ्यूल के दामों में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद एयरलाइंस की परिचालन लागत बढ़ने की संभावना है। ऐसे में आने वाले समय में फ्लाइट टिकटों की कीमतों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

सरकार ने घरेलू एयरलाइंस के लिए एक नई प्राइस स्टेबलाइजेशन स्कीम शुरू की है, जिसके तहत विमानन कंपनियां तीन साल तक के लिए एटीएफ की कीमतें तय कर सकेंगी। इस योजना का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन कीमतों के उतार-चढ़ाव से एयरलाइंस को राहत देना और विमानन क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना है।

नई व्यवस्था के तहत इस स्वैच्छिक योजना में शामिल होने वाली एयरलाइंस को एटीएफ के लिए 115 रुपये प्रति लीटर की निर्धारित कीमत चुकानी होगी। इससे पहले यह दर लगभग 104.92 रुपये प्रति लीटर थी। यानी नई दरों के लागू होने से जेट फ्यूल की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विमानन उद्योग में ईंधन कुल परिचालन खर्च का बड़ा हिस्सा होता है, इसलिए इसका सीधा असर टिकट कीमतों पर पड़ सकता है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह योजना पूरी तरह वैकल्पिक है। जो एयरलाइंस इस फ्रेमवर्क का हिस्सा नहीं बनना चाहेंगी, वे बाजार आधारित दरों पर ईंधन खरीदती रहेंगी। वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ी यह कीमत लगभग 142 रुपये प्रति लीटर के आसपास बताई जा रही है। ऐसे में एयरलाइंस को यह तय करना होगा कि वे स्थिर कीमतों वाली योजना चुनें या बाजार की परिस्थितियों के अनुसार जोखिम उठाएं।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्राइस स्टेबलाइजेशन स्कीम से जुड़ने वाली एयरलाइंस को भविष्य में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और जेट फ्यूल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से सुरक्षा मिलेगी। हालांकि यदि वैश्विक बाजार में ईंधन की कीमतें कम होती हैं तो योजना में शामिल कंपनियां उस लाभ से वंचित भी रह सकती हैं।

सरकार द्वारा तय किया गया फिक्स्ड प्राइसिंग फॉर्मूला 86.32 रुपये प्रति लीटर के ‘फ्री-ऑन-बोर्ड’ (FOB) बेंचमार्क पर आधारित है। इसमें एयरपोर्ट शुल्क, तेल कंपनियों का मार्जिन और विभिन्न करों को भी शामिल किया गया है। इस व्यवस्था के तहत दिल्ली में एटीएफ की प्रभावी कीमत लगभग 115 रुपये प्रति लीटर, मुंबई में 114.5 रुपये प्रति लीटर और चेन्नई में करीब 139 रुपये प्रति लीटर होगी।

यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक परिस्थितियों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और जेट फ्यूल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसके बावजूद पिछले कुछ महीनों तक घरेलू बाजार में एटीएफ की कीमतों को अपेक्षाकृत स्थिर रखा गया था। इससे सरकारी तेल विपणन कंपनियों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ा और उन्हें नुकसान उठाना पड़ा।

इसी स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने लगभग 10,000 करोड़ रुपये के प्राइस स्टेबलाइजेशन फ्रेमवर्क को मंजूरी दी है। इस व्यवस्था के तहत यदि वैश्विक कीमतें निर्धारित आधार मूल्य से ऊपर जाती हैं तो सरकार तेल कंपनियों को अंतर की भरपाई के लिए बिना ब्याज के अग्रिम राशि उपलब्ध कराएगी। वहीं जब अंतरराष्ट्रीय कीमतें कम होंगी, तब अतिरिक्त राशि की वसूली कर उसे सरकारी कोष में जमा किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह नई नीति विमानन क्षेत्र को दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान कर सकती है, लेकिन जेट फ्यूल की बढ़ी हुई कीमतों का असर यात्रियों की जेब पर भी पड़ सकता है। यदि एयरलाइंस बढ़ी हुई लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डालती हैं तो आने वाले दिनों में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह की फ्लाइट टिकटें महंगी हो सकती हैं।

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