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चढ़ावा चोरी पर मायावती की नसीहत, आस्था के मुद्दे का राजनीतिकरण न करें दल

चढ़ावा चोरी पर मायावती की नसीहत, आस्था के मुद्दे का राजनीतिकरण न करें दल

अयोध्या स्थित श्री राम मंदिर में चढ़ावे में कथित चोरी, हेराफेरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर सियासी बयानबाजी के बीच बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की, लेकिन साथ ही राजनीतिक दलों से इस मुद्दे का राजनीतिकरण न करने की अपील भी की।

मायावती ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित चढ़ावे से जुड़ी चोरी, गबन और हेराफेरी जैसी खबरें बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आस्था से जुड़े इस विषय को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना उचित नहीं है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि अयोध्या के श्री राम मंदिर में भी देश के अन्य प्रमुख और प्रसिद्ध मंदिरों की तरह चढ़ावे के संग्रह, लेखा-जोखा और निगरानी की पारदर्शी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। उनके अनुसार, इससे भविष्य में किसी भी प्रकार की शिकायत या विवाद की संभावना कम होगी और श्रद्धालुओं का विश्वास भी मजबूत रहेगा।

मायावती ने अपने बयान में यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है कि वे राजनीति के अपराधीकरण, अपराध के राजनीतिकरण, धर्म के राजनीतिकरण और राजनीति में अंधी धार्मिकता को बढ़ावा देने से बचें। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि धार्मिक आस्था के विषयों को राजनीति से दूर रखें और निष्पक्ष जांच प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखें।

गौरतलब है कि रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से अयोध्या में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं और मंदिर में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में चढ़ावा आ रहा है। हाल ही में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी, चोरी और हेराफेरी के आरोप सामने आने के बाद पुलिस ने इस मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच जारी है और मामले की विस्तृत पड़ताल की जा रही है।

इस घटनाक्रम को लेकर विपक्षी दल राज्य और केंद्र सरकार पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। वहीं, मायावती ने इस पूरे विवाद के बीच पारदर्शी जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और धार्मिक मामलों को राजनीतिक विवाद से दूर रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

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