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14-15 जुलाई को लखनऊ में होगा FUPC एक्सपो 2026, भारतीय व्यंजनों को बचाने पर रहेगा फोकस

14-15 जुलाई को लखनऊ में होगा FUPC एक्सपो 2026, भारतीय व्यंजनों को बचाने पर रहेगा फोकस

लखनऊ, 7 जुलाई: फेडरेशन ऑफ उत्तर प्रदेश कैटरर्स (FUPC) ने राजधानी लखनऊ के होटल सिल्वेट में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान आगामी FUPC AGM एवं एक्सपो-2026 की रूपरेखा साझा की। फेडरेशन ने बताया कि यह दो दिवसीय आयोजन 14 और 15 जुलाई को आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य कैटरिंग एवं हॉस्पिटेलिटी उद्योग को नई दिशा देना, आधुनिक तकनीकों से जोड़ना और पारंपरिक भारतीय खानपान को बढ़ावा देना है। इस आयोजन में देशभर के कैटरर्स, शेफ, फूड इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञ, उद्यमी और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए FUPC के अध्यक्ष तरुण साहनी ने कहा कि बढ़ती ईंधन लागत और एलपीजी की बढ़ती कीमतों के कारण कैटरिंग उद्योग कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में उद्योग को भविष्य के लिए तैयार करने के उद्देश्य से वैकल्पिक ईंधन (Alternate Fuel), ऊर्जा की बचत करने वाली तकनीकों और आधुनिक उपकरणों के उपयोग पर विशेष चर्चा होगी, ताकि संचालन लागत कम हो और सेवाओं की गुणवत्ता भी बनी रहे।

फेडरेशन ने बताया कि इस वर्ष एक्सपो का एक प्रमुख विषय “रिवाइवल ऑफ लॉस्ट क्यूज़ीन” रखा गया है। इसके तहत उत्तर प्रदेश सरकार की ‘एक जिला-एक व्यंजन’ योजना की भावना के अनुरूप प्रदेश और देश के विभिन्न क्षेत्रों के पारंपरिक एवं विलुप्तप्राय व्यंजनों को फिर से पहचान दिलाने का प्रयास किया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि आज अधिकांश आयोजनों में चीनी (Chinese) व्यंजनों का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जबकि भारत की समृद्ध खाद्य संस्कृति और पारंपरिक व्यंजनों का महत्व कम होता दिखाई दे रहा है। ऐसे में अलग-अलग क्षेत्रों के प्रसिद्ध भारतीय व्यंजनों को बढ़ावा देकर उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की जरूरत है।

फेडरेशन का मानना है कि भारतीय व्यंजन केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि देश की संस्कृति, परंपरा और विरासत का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए ऐसे व्यंजनों को विलुप्त होने से बचाने, उन्हें आधुनिक प्रस्तुतिकरण के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने तथा स्थानीय कारीगरों और रसोइयों को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

आयोजन के दौरान कैटरिंग उद्योग से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा होगी। इनमें कैटरिंग सेवाओं के लिए समय-सीमा निर्धारित करने, कार्यप्रणाली को अधिक व्यवस्थित बनाने, कैटरर्स को आधुनिक तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा उपलब्ध कराने तथा उद्योग में कौशल विकास को बढ़ावा देने जैसे विषय शामिल हैं। फेडरेशन का मानना है कि बेहतर प्रशिक्षण और स्पष्ट कार्यप्रणाली से उद्योग की गुणवत्ता और विश्वसनीयता दोनों में सुधार होगा।

FUPC ने यह भी बताया कि कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े युवाओं और उद्यमियों को अपना उद्योग स्थापित करने के लिए ऋण (Loan) सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे। इसके साथ ही नए उद्यमियों को व्यवसाय शुरू करने, संचालन और प्रबंधन से जुड़ी आवश्यक जानकारी एवं प्रशिक्षण देने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।

फेडरेशन अपने सभी सदस्यों को निःशुल्क दुर्घटना बीमा उपलब्ध करा रहा है, ताकि किसी सदस्य की असामयिक मृत्यु की स्थिति में उसके परिवार को आर्थिक सुरक्षा मिल सके। इसके अलावा सदस्यों की व्यावसायिक समस्याओं के समाधान और उनके कौशल विकास के लिए समय-समय पर निःशुल्क प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित किए जाएंगे।

आयोजन में आधुनिक तकनीकों, ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों, खाद्य सुरक्षा, नवाचार, भारतीय पारंपरिक व्यंजनों के संरक्षण और हॉस्पिटेलिटी सेक्टर के भविष्य से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे। फेडरेशन ऑफ उत्तर प्रदेश कैटरर्स ने विश्वास जताया कि 14 और 15 जुलाई को आयोजित होने वाला यह आयोजन न केवल कैटरिंग उद्योग को नई दिशा देगा, बल्कि उत्तर प्रदेश और भारत की समृद्ध पाक विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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