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लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पर अखिलेश का तंज, बोले- ‘जो चढ़ावा नहीं बचा पाए, वो पेपर लीक कैसे बचाएंगे’

लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राम मंदिर चंदा विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि “जो चढ़ावा नहीं बचा पाए, वो पेपर लीक कैसे बचाएंगे।” वहीं सरकार ने परीक्षा माफिया पर शिकंजा कसने के लिए सख्त सजा, भारी जुर्माना, स्पेशल टास्क फोर्स और फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसी व्यवस्थाओं का बचाव किया।

लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पर अखिलेश का तंज, बोले- ‘जो चढ़ावा नहीं बचा पाए, वो पेपर लीक कैसे बचाएंगे’

नई दिल्ली, 28 जुलाई 2026। लोकसभा में मंगलवार को लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर हुई लंबी चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष एवं सांसद अखिलेश यादव ने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और राम मंदिर चंदा विवाद को जोड़ते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।

अखिलेश यादव ने कहा, “जो चढ़ावा नहीं बचा पाए, वो पेपर लीक कैसे बचाएंगे।” उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा दिलाकर प्रधानमंत्री को भी राजनीतिक संकट से बचाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि समस्या कानून की नहीं, बल्कि सरकार की नीयत की है।

इस दौरान तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने भी सरकार को घेरते हुए कहा कि यह विधेयक समाधान नहीं, बल्कि सरकार की विफलता की स्वीकारोक्ति है। उन्होंने कहा कि लगातार पेपर लीक और परीक्षाएं रद्द होने की घटनाओं ने युवाओं का भरोसा तोड़ा है और केवल सजा बढ़ाने से व्यवस्था नहीं सुधरेगी।

वहीं कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने को लेकर गंभीर नहीं है और यह कानून उसकी प्रशासनिक विफलताओं को छिपाने का प्रयास है।

सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विधेयक का बचाव करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना है। उन्होंने बताया कि संशोधन के तहत पेपर लीक और नकल के मामलों में 5 से 10 वर्ष तक की सजा और 50 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। संगठित गिरोहों के मामलों में 7 से 10 वर्ष की जेल और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकेगा। परीक्षा आयोजित करने वाली दोषी एजेंसियों पर 5 करोड़ रुपये तक जुर्माना और 8 वर्ष तक प्रतिबंध लगाने का भी प्रावधान किया गया है।

उन्होंने बताया कि मामलों की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स गठित होगी, जांच दो महीने में पूरी करने का लक्ष्य रहेगा और सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कर तीन महीने के भीतर फैसला सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार इस महत्वपूर्ण विधेयक पर व्यापक चर्चा चाहती है। सभी दलों की सहमति से चर्चा का समय बढ़ाया गया है और आवश्यकता पड़ने पर इसे और बढ़ाने के लिए भी सरकार तैयार है।

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