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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सोनम वांगचुक का पहला बयान, बोले- ‘यह लोकतंत्र, शांति और धैर्य की जीत’

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह शांतिपूर्ण आंदोलन, धैर्य और युवाओं की एकजुटता की सफलता है। वहीं, सीजेपी ने स्पष्ट किया कि उनकी अन्य मांगों पर लिखित आश्वासन मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सोनम वांगचुक का पहला बयान, बोले- ‘यह लोकतंत्र, शांति और धैर्य की जीत’

नई दिल्ली, 25 जुलाई। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने पहली प्रतिक्रिया देते हुए इसे लोकतंत्र की जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह शांतिपूर्ण संघर्ष, धैर्य और युवाओं की एकजुटता की सफलता का परिणाम है।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए वांगचुक ने कहा, “यह लोकतंत्र की जीत है। डायरेक्ट डेमोक्रेसी… सीधे सड़कों से। यह शांति, सब्र और लगन की जीत है। सीजेपी, देश के जेन-ज़ी और देश के हर कोने से खड़े हुए नागरिकों को बधाई। अब जवाबदेही से सुधारों की ओर बढ़ने का समय है।”

सोनम वांगचुक ने इससे पहले शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर आंदोलन का समर्थन किया था और 26 दिन तक आमरण अनशन भी किया था। बाद में केंद्र सरकार के दो मंत्रियों से बातचीत और लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया था।

उधर, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का स्वागत करते हुए कहा कि छात्रों का आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है। जंतर-मंतर पर संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके, प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि जब तक बाकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा।

सीजेपी के अनुसार सरकार के साथ हुई वार्ता में तीन प्रमुख मांगें रखी गई थीं—केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, कथित नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता तथा आंदोलन के दौरान दर्ज सभी एफआईआर वापस लेना। संगठन का दावा है कि पहली मांग पूरी हो चुकी है, जबकि शेष दो मांगों पर सरकार ने सकारात्मक संकेत दिए हैं।

इससे पहले सोनम वांगचुक ने सरकार के साथ किसी भी प्रकार के समझौते की अटकलों को खारिज करते हुए कहा था कि उन्होंने अनशन केवल लिखित आश्वासन मिलने के बाद समाप्त किया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य आंदोलन में शामिल छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था और वे किसी भी प्रकार की हिंसा या टकराव से बचना चाहते थे।

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