BJP को यूपी में बुलडोजर पसंद नहीं! नितिन नबीन ने स्वागत के शक्ति प्रदर्शन पर लगाया ब्रेक
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का पश्चिमी उत्तर प्रदेश दौरा चर्चा में है। मेरठ में उनके स्वागत के लिए बुलडोजरों से पुष्पवर्षा की गई, लेकिन अगले ही दिन स्वागत के लिए बुलडोजर लगाए जाने के बावजूद नबीन का काफिला वहां बिना रुके आगे निकल गया। इसके बाद पार्टी के भीतर उनके बुलडोजर स्वागत से नाराजगी जताने और आगे इस तरह के शक्ति प्रदर्शन से बचने की सलाह दिए जाने की खबर सामने आई।
21 सितंबर को मेरठ पहुंचने पर नितिन नबीन का काशी टोल प्लाजा पर भव्य स्वागत किया गया। स्वागत के लिए कई बुलडोजर कतार में खड़े किए गए थे और उनके काफिले पर फूलों की बारिश की गई। इसके अलावा ढोल-नगाड़े, पार्टी के झंडे और कार्यकर्ताओं की भीड़ भी मौजूद रही। नबीन के स्वागत की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी चर्चा में रहे।
हालांकि, 22 सितंबर को मेरठ से सहारनपुर जाते समय सिवाया टोल प्लाजा पर एक बार फिर बुलडोजरों के साथ स्वागत की तैयारी की गई थी। यहां करीब 11 बुलडोजर खड़े किए गए थे और भाजपा नेताओं तथा कार्यकर्ताओं का एक समूह स्वागत के लिए मौजूद था। लेकिन नितिन नबीन का काफिला बिना रुके आगे निकल गया। इसके बाद पार्टी सूत्रों के हवाले से खबर सामने आई कि भाजपा अध्यक्ष ने बुलडोजर से स्वागत को लेकर नाराजगी जताई और नेताओं को जमीन पर उतरकर संगठन के लिए काम करने की नसीहत दी।
रिपोर्टों के मुताबिक, नबीन ने कार्यकर्ताओं को संदेश दिया कि उनके स्वागत के लिए बड़े-बड़े होर्डिंग, बुलडोजर और सड़क पर शक्ति प्रदर्शन करने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय प्रत्येक कार्यकर्ता अपने घर पर भाजपा का झंडा लगाए और पार्टी समर्थकों के घरों पर भी झंडा लगाने का अभियान चलाए। यानी संगठन की ताकत सड़क पर होने वाले भव्य स्वागत के बजाय कार्यकर्ता और बूथ स्तर पर दिखाई दे।
मेरठ में बुलडोजर से स्वागत का मामला उस समय और चर्चा में आ गया, जब शहर के सेंट्रल मार्केट प्रकरण को लेकर भी लोगों के बीच बुलडोजर कार्रवाई को लेकर चिंता और सवाल उठ रहे थे। इसी दौरान बुलडोजर से भाजपा अध्यक्ष के स्वागत को लेकर प्रभावित लोगों की ओर से प्रतिक्रियाएं सामने आईं। हालांकि, नितिन नबीन के फैसले के पीछे पार्टी की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बुलडोजर पिछले कुछ वर्षों में एक प्रमुख राजनीतिक प्रतीक बन चुका है। योगी आदित्यनाथ सरकार के कार्यकाल में अवैध कब्जों और अवैध निर्माणों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई में बुलडोजर के इस्तेमाल की तस्वीरें सामने आती रही हैं। भाजपा समर्थकों ने इसे सख्त प्रशासन और कानून-व्यवस्था से जोड़ा, जबकि विपक्ष ने इसे ‘बुलडोजर राजनीति’ का नाम देकर सरकार पर सवाल उठाए।
नितिन नबीन का पश्चिमी यूपी दौरा हालांकि सिर्फ स्वागत कार्यक्रमों तक सीमित नहीं था। उनका मुख्य फोकस पार्टी संगठन को मजबूत करने और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बूथ स्तर की तैयारियों की समीक्षा पर रहा। मेरठ में उन्होंने युवा संवाद, शक्ति केंद्र सम्मेलन और पार्टी के विभिन्न स्तरों के पदाधिकारियों के साथ बैठकें कीं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 14 जिलों और 19 संगठनात्मक जिलों में फैली 71 विधानसभा सीटों को भाजपा की चुनावी तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नबीन की बैठकों में बूथ स्तर की तैयारी, शक्ति केंद्रों को सक्रिय करने, कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद और स्थानीय स्तर के फीडबैक पर जोर दिया गया।
नबीन ने मौजूदा सांसदों और विधायकों के साथ-साथ पूर्व सांसदों, पूर्व विधायकों और पुराने संगठनात्मक पदाधिकारियों से भी संवाद किया। इसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर पार्टी की स्थिति और संगठन से जुड़े मुद्दों की जानकारी हासिल करना बताया गया है। पार्टी के भीतर पुराने मतभेदों को पीछे छोड़कर संगठनात्मक काम में सभी नेताओं को साथ लेकर चलने पर भी जोर दिया गया।
इस पूरे दौरे से भाजपा की आगामी चुनावी रणनीति में संगठन को प्राथमिकता देने का संकेत मिलता है। स्वागत में बुलडोजर और बड़े होर्डिंग के बजाय घर-घर पार्टी का झंडा लगाने का संदेश इस बात पर जोर देता है कि 2027 की तैयारी में सड़क पर दिखने वाले शक्ति प्रदर्शन से ज्यादा बूथ और कार्यकर्ता स्तर की सक्रियता पर ध्यान दिया जाए।