सरकारी स्कूल का वीडियो बनाने पर FIR, CJP कार्यकर्ता गौरव भारती की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट की रोक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी स्कूल का वीडियो बनाने और उसे सोशल मीडिया पर साझा करने के मामले में CJP कार्यकर्ता गौरव भारती को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने मामले में उनकी गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी है। साथ ही, अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब दाखिल करने को कहा है।
यह मामला फर्रुखाबाद के करणपुर मजरा बसमल स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक, गौरव भारती ने 16 अगस्त 2026 को स्कूल का वीडियो रिकॉर्ड किया था। वीडियो में स्कूल परिसर की कथित जर्जर स्थिति, पानी जमा होने और बच्चों के बैठने की व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को दिखाया गया था।
गौरव भारती की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया कि जिस दिन वीडियो बनाया गया, उस दिन स्कूल बंद था। याचिका के मुताबिक, वीडियो सरकारी स्कूल की स्थिति और बच्चों को उपलब्ध सुविधाओं को सामने लाने के उद्देश्य से ‘गुड फेथ’ में बनाया गया था। याचिकाकर्ता ने इसे सार्वजनिक महत्व से जुड़ा मामला बताते हुए अपनी कार्रवाई को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में बताया है।
वहीं, पुलिस की FIR में गौरव भारती पर स्कूल का कथित तौर पर अवैध रूप से वीडियो बनाने और स्कूल की स्थिति को गलत तरीके से पेश करने के आरोप लगाए गए हैं। FIR के अनुसार, गौरव एक अज्ञात व्यक्ति के साथ स्कूल पहुंचे थे और शिक्षकों के साथ कथित तौर पर अनर्गल बातें की गई थीं। इसी आधार पर उनके खिलाफ BNS और IT Act की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया।
गौरव भारती ने 19 अगस्त को दर्ज FIR को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिका में FIR में लगाई गई धाराओं पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि कथित तौर पर कही गई ‘अनर्गल बातों’ का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है। याचिका में यह भी पूछा गया कि किन लोगों से ऐसी बातें कही गईं और उन्हें जानबूझकर अपमान की श्रेणी में किस आधार पर रखा गया।
याचिका में BNS की धारा 352 और 353 के साथ IT Act की धारा 66 को भी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि किसी सरकारी स्कूल की इमारत का वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया पर साझा करना अपने आप में IT Act की धारा 66 के तहत बताए गए अपराध की श्रेणी में नहीं आता।
गौरव भारती की ओर से संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का भी हवाला दिया गया है। याचिका में कहा गया कि सरकारी स्कूलों की स्थिति और बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करना जनहित से जुड़ा विषय है। इसी आधार पर उन्होंने FIR और उससे जुड़ी आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग की है।
इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति पदम नारायण मिश्रा की डिवीजन बेंच ने की। कोर्ट ने फिलहाल मामले के आरोपों या FIR की वैधता पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है। अदालत ने सभी संबंधित पक्षों को काउंटर एफिडेविट दाखिल करने के लिए समय दिया है।
फिलहाल हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के तहत गौरव भारती की गिरफ्तारी पर रोक लगी हुई है। मामले में आगे की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और अन्य पक्षों के जवाब के आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई पर विचार करेगी।