मुख्य सामग्री पर जाएं
ब्रेकिंग न्यूज़
पंजाब चुनाव का BJP ने तय किया मुद्दा, अमित शाह बोले- ‘नशा मुक्त पंजाब’ पर लड़ेंगे चुनाव बहरीन की महिला SGPC सराय में कैसे पहुंची? AAP ने सुखबीर बादल से मांगा जवाब ‘BJP के कई विधायक संपर्क में’, अखिलेश यादव का बड़ा दावा, बोले- एडजस्ट कैसे करें? महंत दिग्विजयनाथ और अवेद्यनाथ को CM योगी ने दी श्रद्धांजलि, सामाजिक समरसता पर दिया जोर CM योगी बोले- सनातन धर्म भारत की मूल आस्था, अपनी पहचान को भूलना हमारी बड़ी भूल थी कुशीनगर में नारायणी नदी का कहर, तटबंध टूटने से कई गांवों में घुसा बाढ़ का पानी जनता दर्शन में CM योगी ने सुनीं 150 लोगों की फरियाद, अधिकारियों को त्वरित समाधान के निर्देश ‘जश्न-ए-इंकलाब’ में CM भगवंत मान की युवाओं से अपील, बोले- भगत सिंह के विचारों को आगे बढ़ाएं सरकारी स्कूल का वीडियो बनाने पर FIR, CJP कार्यकर्ता गौरव भारती की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट की रोक आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा, इटावा DFO विकास नायक और चालक की मौत

दिल्ली-NCR में प्रदूषण से निपटने की तैयारी तेज, हवा बिगड़ने से पहले होगा एक्शन

दिल्ली-NCR में प्रदूषण से निपटने की तैयारी तेज, हवा बिगड़ने से पहले होगा एक्शन

दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए इस बार पहले से तैयारियां तेज कर दी गई हैं। आमतौर पर अक्टूबर-नवंबर में हवा की गुणवत्ता खराब होने के बाद प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को सख्त किया जाता है, लेकिन इस बार कोशिश है कि प्रदूषण बढ़ने का इंतजार न किया जाए और संभावित स्थिति से पहले ही जरूरी कदम उठा लिए जाएं। इसके लिए सड़क की धूल, वाहनों का धुआं, निर्माण कार्य, औद्योगिक प्रदूषण, कचरा जलाने और पराली जैसे अलग-अलग स्रोतों पर एक साथ काम करने की योजना बनाई जा रही है।

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के पीछे कई कारण हैं। सड़कों पर जमा महीन धूल, वाहनों से निकलने वाला धुआं, फैक्ट्रियों का उत्सर्जन, निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाला मलबा तथा खुले में कचरा जलाने से हवा की गुणवत्ता प्रभावित होती है। सर्दियों में मौसम की परिस्थितियां भी प्रदूषण को जमीन के करीब रोकने में भूमिका निभाती हैं। ऐसे में अलग-अलग स्रोतों से निकलने वाले प्रदूषक हवा में जमा होकर AQI को खराब कर सकते हैं।

इसी चुनौती को देखते हुए हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के बीच हुई बैठक में एनसीआर की वायु गुणवत्ता सुधारने की तैयारियों पर चर्चा हुई। उत्तर प्रदेश के एनसीआर क्षेत्र में आने वाले आठ जिलों में सड़क की धूल कम करने के लिए मैकेनिकल डीप क्लीनिंग पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य सिर्फ झाड़ू से सफाई करने के बजाय मशीनों के जरिए सड़क पर जमा महीन धूल को हटाना है, ताकि वाहनों की आवाजाही के दौरान यह धूल दोबारा हवा में न पहुंचे।

दिल्ली में भी छोटी और संकरी सड़कों की सफाई के लिए 30 इलेक्ट्रिक मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनों की तैयारी की जा रही है। माना जाता है कि सड़कों पर जमा धूल हवा में पहुंचने वाले पार्टिकुलेट मैटर, खासकर PM10 और PM2.5 के स्तर को प्रभावित कर सकती है। इसलिए सड़क की सफाई को प्रदूषण नियंत्रण की रणनीति का अहम हिस्सा बनाया जा रहा है।

प्रदूषण के सबसे चर्चित कारणों में शामिल पराली जलाने की घटनाओं में भी पिछले कुछ वर्षों में कमी दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के एनसीआर वाले हिस्सों, राजस्थान के एनसीआर जिलों और दिल्ली में पराली जलाने की घटनाएं वर्ष 2021 में 78,550 थीं। 2022 में यह संख्या 53,792, 2023 में 39,186, 2024 में 12,750 और 2025 में करीब 6,080 रह गई। हालांकि पराली जलाने की घटनाओं में कमी के बावजूद दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की समस्या बनी हुई है। इसलिए अब प्रदूषण के अन्य स्रोतों पर भी निगरानी और कार्रवाई बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के एनसीआर जिलों में औद्योगिक प्रदूषण की रियल टाइम मॉनिटरिंग को भी मजबूत करने की तैयारी है। कई औद्योगिक इकाइयों में OCEMS यानी Online Continuous Emission Monitoring System लगाए गए हैं। इस तकनीक की मदद से औद्योगिक इकाइयों से होने वाले उत्सर्जन की लगातार निगरानी की जा सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि प्रदूषण बढ़ने के पीछे धूल, ट्रैफिक, निर्माण, उद्योग या कचरा जलाने में से कौन सा स्रोत अधिक जिम्मेदार है।

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण के लिए CAQM यानी Commission for Air Quality Management की ओर से ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी GRAP के तहत भी पहले से तैयारी की जा रही है। इस बार जोर इस बात पर है कि केवल AQI खराब होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय मौसम और वायु गुणवत्ता के पूर्वानुमान को देखते हुए पहले ही कुछ कदम उठाए जाएं।

स्थिति गंभीर होने पर GRAP के तहत पार्किंग शुल्क बढ़ाने, वर्क फ्रॉम होम, हाइब्रिड कक्षाएं, निर्माण गतिविधियों पर रोक और वाहनों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध जैसे उपाय लागू किए जा सकते हैं। इसका उद्देश्य प्रदूषण के बेहद खराब या गंभीर स्तर तक पहुंचने से पहले ही उत्सर्जन को नियंत्रित करना है।

हालांकि प्रदूषण से निपटने की इस पूरी रणनीति में सिर्फ मशीनों और मॉनिटरिंग सिस्टम की भूमिका पर्याप्त नहीं होगी। सड़क की सफाई के बाद अगर दोबारा धूल जमा होती है, निर्माण सामग्री खुले में पड़ी रहती है, कचरा जलाया जाता है या वाहनों से लगातार प्रदूषण बढ़ता रहता है, तो हवा की गुणवत्ता सुधारना मुश्किल होगा। इसलिए इस बार फोकस केवल AQI के आंकड़े पर नहीं, बल्कि प्रदूषण के स्रोत की पहचान और उसे समय रहते नियंत्रित करने पर है।

दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों का प्रदूषण अचानक पैदा नहीं होता। इसकी वजह बनने वाली गतिविधियां कई सप्ताह और महीनों पहले से शुरू हो जाती हैं। ऐसे में इस बार की रणनीति का मुख्य उद्देश्य हवा खराब होने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय संभावित प्रदूषण की स्थिति से पहले ही तैयारी करना और अलग-अलग स्रोतों पर एक साथ कार्रवाई करना है।

Share
अगला लेख → पंजाब चुनाव का BJP ने तय किया मुद्दा, अमित शाह बोले- ‘नशा मु…

टिप्पणी करें

Your email address will not be published. Required fields are marked *