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‘अमेरिकी नागरिकों को खतरा’, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच US ने जारी की एडवाइजरी

‘अमेरिकी नागरिकों को खतरा’, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच US ने जारी की एडवाइजरी

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमलों के बीच अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। अमेरिकी मिशनों ने क्षेत्र में रह रहे और वहां की यात्रा करने वाले अमेरिकी नागरिकों को अधिक सतर्क रहने की सलाह दी है। साथ ही, उन्हें संभावित हवाई उड़ानों के रद्द होने, हवाई क्षेत्र बंद होने और यात्रा में बाधा आने जैसी परिस्थितियों के लिए पहले से तैयार रहने को कहा गया है।

अमेरिकी सुरक्षा एडवाइजरी के मुताबिक, क्षेत्र में जारी शत्रुतापूर्ण गतिविधियों के कारण हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं। इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित रहने के बजाय दूसरे क्षेत्रों तक भी पहुंच सकता है। एडवाइजरी में आशंका जताई गई है कि ईरान और उसके समर्थन वाले समूह विदेशों में अमेरिकी प्रतिष्ठानों या अमेरिका तथा उसके नागरिकों से जुड़े स्थानों को निशाना बना सकते हैं।

यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब पर किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद सुरक्षा चिंताएं और बढ़ गई हैं। खबर में बताए गए हमलों में 10 अक्टूबर को रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए घातक हमले का भी उल्लेख है, जिसमें एक भारतीय नागरिक समेत 13 लोगों की मौत होने की बात कही गई है। इन घटनाओं के बाद क्षेत्र में रहने वाले विदेशी नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है।

अमेरिका हूती विद्रोहियों को ईरान समर्थित प्रमुख सशस्त्र समूह मानता है। अमेरिकी आकलन के अनुसार, हूती क्षेत्र में ईरान के सहयोगी नेटवर्क का हिस्सा हैं। ईरान पर हूतियों को हथियार, आर्थिक सहायता और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के आरोप भी लगाए जाते रहे हैं। सऊदी अरब पर हुए हमलों ने अमेरिका और ईरान के बीच पहले से जारी तनाव को एक नया क्षेत्रीय आयाम दे दिया है।

अमेरिकी मिशनों ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे हवाई अड्डों और एयरलाइनों से जुड़ी आधिकारिक सूचनाओं पर लगातार नजर रखें। यात्रा से पहले अपनी उड़ानों की स्थिति की पुष्टि करें और आपात स्थिति में संपर्क करने के लिए जरूरी जानकारी तैयार रखें। यरुशलम स्थित अमेरिकी दूतावास ने भी अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा संबंधी निर्देश और संभावित आपातकालीन सहायता से जुड़ी जानकारी साझा की है।

इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव को लेकर भी चिंताएं बनी हुई हैं। दी गई जानकारी के अनुसार, फरवरी में शुरू हुआ संघर्ष जून में हुए समझौते के टूटने के बाद से सैन्य और राजनयिक गतिरोध में फंसा हुआ है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर ईरान की ओर से लगाई जा रही पाबंदियों और ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

सऊदी अरब पर हूतियों के हमलों और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव से यह आशंका बढ़ गई है कि संघर्ष का दायरा और व्यापक हो सकता है। ऐसे हालात में अमेरिकी मिशनों की एडवाइजरी का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को संभावित सुरक्षा जोखिमों, यात्रा में व्यवधान और आपात परिस्थितियों के लिए तैयार रहने की चेतावनी देना है।

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