
अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगने के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान और इजराइल को लेकर अहम बयान दिया है। ट्रंप ने कहा है कि फिलहाल अमेरिका की ईरान पर नए हमले की कोई तत्काल योजना नहीं है और दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। हालांकि, उन्होंने सैन्य कार्रवाई का विकल्प पूरी तरह खारिज नहीं किया है। दूसरी ओर, ट्रंप ने इजराइल को हर साल मिलने वाली करीब 4 अरब डॉलर की अमेरिकी मदद इस साल के अंत तक बंद करने की बात कही है।
फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत चल रही है और इसका नतीजा आगे देखा जाएगा। उन्होंने मौजूदा स्थिति पर संतोष जताते हुए कहा कि अमेरिका को वह सब मिलता दिख रहा है, जो वह चाहता है। हालांकि, ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर अमेरिकी सेना कार्रवाई के लिए तैयार है।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब 3 नवंबर को हुए अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में उनकी रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा राजनीतिक नुकसान हुआ है। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट में बहुमत हासिल कर लिया है, जबकि प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स का नियंत्रण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। इस नतीजे को ट्रंप की नीतियों के खिलाफ मतदाताओं की नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है। महंगाई, बढ़ती कीमतें और ईरान के साथ जारी संघर्ष चुनाव के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे।
इससे पहले 2 नवंबर को अमेरिकी सेना ने ईरान के केशम द्वीप पर हमला किया था। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे अपने सैन्य संसाधनों की सुरक्षा के लिए की गई सीमित रक्षात्मक कार्रवाई बताया। ऐसे में ट्रंप का ताजा बयान संकेत देता है कि अमेरिका फिलहाल बड़े सैन्य अभियान के बजाय बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, ईरान के साथ बातचीत का कोई अंतिम नतीजा अभी सामने नहीं आया है।
इजराइल को लेकर भी ट्रंप ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ हुए समझौते के तहत इजराइल को दी जाने वाली सालाना 4 अरब डॉलर की अमेरिकी मदद इस साल के अंत तक बंद कर दी जाएगी। हालांकि, ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका इजराइल को हथियार बेचने का विकल्प जारी रख सकता है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब ईरान के साथ संघर्ष और इजराइल की क्षेत्रीय नीति अमेरिकी राजनीति में चर्चा के बड़े मुद्दे बने हुए हैं।
ट्रंप के रुख में बदलाव के पीछे चुनावी दबाव और बदलते राजनीतिक समीकरण अहम कारण माने जा रहे हैं। सीनेट में बहुमत गंवाने के बाद उनकी सरकार को कई फैसलों पर डेमोक्रेट्स के विरोध का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, ईरान युद्ध से जुड़ी महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने भी अमेरिकी मतदाताओं को प्रभावित किया है। ऐसे में ट्रंप के सामने अब घरेलू राजनीति संभालने के साथ-साथ पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की चुनौती भी है।
ध्यान दें: उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक ट्रंप ने ईरान पर हमले की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं की है। इसलिए इसे युद्ध समाप्त करने का ऐलान नहीं, बल्कि फिलहाल नए हमले की तत्काल योजना न होने और बातचीत जारी रहने के बयान के रूप में समझना चाहिए।



