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मोटर वाहन कानून के प्रावधानों पर रिपोर्ट जल्द दाखिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को दिए आदेश

मोटर वाहन कानून के प्रावधानों पर रिपोर्ट जल्द दाखिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को दिए आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 23 राज्यों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों को मोटर वाहन कानून के प्रावधानों को लागू करने से जुड़ी रिपोर्ट जमा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से मोटर वाहन कानून के हालिया संशोधनों के कार्यान्वयन, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और सड़क सुरक्षा उपायों के अनुपालन पर रिपोर्ट मांगी है। इस मामले में 5 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश ने पहले ही अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है।

जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने जानकारी दी कि पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और दिल्ली ने अपनी अनुपालन रिपोर्ट जमा कर दी है। पिछले साल 2 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 136ए को नियम 167ए के साथ लागू करने का निर्देश दिया था, जिसमें तेज गति वाले वाहनों की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी का प्रावधान है।

सुप्रीम कोर्ट की समिति को सौंपी जाएगी रिपोर्ट

बेंच ने शेष 23 राज्यों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों से जल्द से जल्द अपनी अनुपालन रिपोर्ट जमा करने को कहा है। यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा पर गठित समिति के साथ साझा की जाएगी। समिति इन रिपोर्टों का विश्लेषण करेगी और अपनी सिफारिशें पेश करेगी, ताकि केंद्र सरकार इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और सड़क सुरक्षा उपायों के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार कर सके।

पीठ की सहायता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल ने कोर्ट को बताया कि 6 राज्यों ने पहले ही अपनी रिपोर्ट जमा कर दी है, और इन रिपोर्टों पर आगे का आदेश दिया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 25 मार्च को इस विषय पर फिर से विचार किया जाएगा। इसके अलावा, समिति रिपोर्ट की समीक्षा के दौरान 6 राज्यों से अतिरिक्त जानकारी और सुझाव भी मांग सकती है।

जनहित याचिका के तहत सुनवाई

यह मामला 2012 में सड़क सुरक्षा को लेकर दायर एक जनहित याचिका से जुड़ा है। मोटर वाहन अधिनियम, 1988 में 2021 के संशोधन के तहत धारा 136ए जोड़ी गई थी। इसका उद्देश्य यातायात प्रबंधन को बेहतर बनाना और यातायात कानूनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना है। इसमें स्पीड कैमरा, सीसीटीवी, स्पीड गन, बॉडी-वॉर्न कैमरा और स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग शामिल है। सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर सुनवाई जारी रखे हुए है।

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