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वाराणसी के 50 मुस्लिम मोहल्लों के नाम परिवर्तन की मांग, हिंदू संगठनों ने महापौर और डीएम को सौंपा पत्र

वाराणसी के 50 मुस्लिम मोहल्लों के नाम परिवर्तन की मांग, हिंदू संगठनों ने महापौर और डीएम को सौंपा पत्र

वाराणसी में कुछ हिंदू संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने ऐसे 50 मोहल्लों के नाम बदलने की मांग की है, जिनके नाम मुस्लिम शासकों या आक्रमणकारियों से जुड़े हुए हैं। इस मांग को लेकर संगठनों ने नगर निगम, महापौर और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। इसके बाद यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है।

औरंगाबाद मोहल्ले का नाम बदलने की मांग

विश्व वैदिक सनातन न्यास के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सिंह ने वाराणसी के महापौर से मुलाकात कर औरंगाबाद का नाम बदलने का अनुरोध किया। उनका कहना है कि यह नाम मुगल शासक औरंगजेब के नाम पर रखा गया था, जो गुलामी और अत्याचार का प्रतीक है। उन्होंने इस मोहल्ले का नाम लक्ष्मी नगर, नारायणी नगर या पूर्ववर्ती नाम शिवाजी नगर करने का सुझाव दिया है।

अन्य 50 मोहल्लों के नाम बदलने की मांग

सनातन रक्षक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय शर्मा ने भी वाराणसी के कई अन्य मोहल्लों, जैसे खलिसपुरा और मदनपुरा, के नाम बदलने की मांग की है। उन्होंने डीएम, नगर आयुक्त और महापौर से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि ये मोहल्ले काशी के पौराणिक और धार्मिक स्थलों में आते हैं। उनका मानना है कि मुगल शासकों ने इन स्थलों के वास्तविक तीर्थ स्वरूप को नष्ट कर यहां नए नाम दे दिए थे।

स्थानीय पार्षद विजय द्विवेदी ने भी महापौर को पत्र लिखकर मांग की है कि इन क्षेत्रों का नाम पौराणिक आधार पर रखा जाए।

राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया

इस मुद्दे पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस प्रवक्ता वैभव त्रिपाठी ने कहा कि जनता ने बीजेपी को शहर के विकास के लिए चुना था, लेकिन सरकार अब नाम बदलकर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करने का प्रयास कर रही है।

स्थानीय निवासी शैलेन्द्र त्रिपाठी ने चिंता जताई कि यदि नाम बदले जाते हैं, तो बैंक, आधार कार्ड, वोटर कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेजों में पते बदलने की समस्या खड़ी हो जाएगी। उन्होंने सवाल किया कि इस असुविधा का समाधान कौन करेगा?

नगर निगम में होगी चर्चा

बीजेपी के पार्षद और उपसभापति नरसिंह दास ने बताया कि हिंदू संगठनों ने नगर आयुक्त और महापौर को पत्र सौंपकर नाम बदलने की मांग की है। हालांकि, अभी इस पर कोई आधिकारिक प्रस्ताव पारित नहीं किया गया है। नगर निगम की बैठक में इस पर चर्चा होगी और उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।

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