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पद स्वीकृत हों या न हों, लंबे समय से कार्यरत कर्मियों को करना होगा परमानेंट; बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा आदेश l

पद स्वीकृत हों या न हों, लंबे समय से कार्यरत कर्मियों को करना होगा परमानेंट; बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा आदेश l

बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि सरकारी या किसी भी संस्था में लंबे समय से कार्यरत कर्मियों को पद स्वीकृत न होने के बावजूद परमानेंट किया जाना होगा। यह फैसला संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान में पिछले 22 वर्षों से काम कर रहे 22 वन मजदूरों के मामले में सुनाया गया है।

मजदूरों ने अपनी नौकरी को परमानेंट करने की मांग की थी, लेकिन औद्योगिक न्यायालय ने इस दावे को इस आधार पर खारिज कर दिया था कि उनके लिए कोई स्वीकृत पद उपलब्ध नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने अपनी उपस्थिति रजिस्टरों और सेवा अवधि के आधार पर स्थायी नौकरी का अधिकार मांगा था।

हाई कोर्ट के जस्टिस मिलिंद एन. जाधव ने कहा कि नियोक्ता कर्मचारियों से लंबे समय तक सेवा लेने के बाद भी पद स्वीकृत न होने का हवाला देकर स्थायी कर्मचारी बनाने से इनकार नहीं कर सकता। यह व्यवहार कर्मचारियों के शोषण के समान है, जो कल्याणकारी कानूनों और सामाजिक न्याय के खिलाफ है।

यहां के मजदूर बुधवार तक वन्य जीवन जैसे बाघ, तेंदुए, शेर और अन्य प्राणियों की देखभाल, पिंजरों की सफाई, खाना खिलाना, औषधि देना, गश्त करना जैसे जोखिम भरे कार्य करते थे। इनके काम के कारण ये वन्यजीवों से परिचित थे और उनकी भूमिका अपरिहार्य थी।

हाई कोर्ट ने औद्योगिक न्यायालय के फैसले को खारिज करते हुए आदेश दिया कि इन मजदूरों को परमानेंट कर्मचारी का दर्जा दिया जाए तथा उन्हें सामाजिक कल्याण अधिनियम के तहत मिलने वाले सभी लाभ प्रदान किए जाएं। अदालत ने सरकार को दो सप्ताह के भीतर बकाया वेतन का भुगतान करने और दस सप्ताह में अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश भी दिया है।

यह फैसला न केवल संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के मजदूरों के लिए राहत की खबर है, बल्कि अन्य संस्थाओं में लंबे समय से कार्यरत अस्थायी कर्मियों के लिए भी मिसाल साबित होगा कि सेवा की अवधि और प्रतिबद्धता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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