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प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी का आरोप: 14 मिनट में 12 वोट गायब, चुनाव आयोग पर सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी का आरोप: 14 मिनट में 12 वोट गायब, चुनाव आयोग पर सवाल

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर वोट डिलीट होने के गंभीर आरोप उठाए और चुनाव प्रक्रिया में व्यवस्थित गड़बड़ी का दावा किया। राहुल ने प्रेज़ेंटेशन दिखाकर कहा कि कई स्थानों पर वोटर्स के रिकॉर्ड सेंट्रलाइज़ तरीके से हटाए जा रहे हैं और खासकर कांग्रेस के वोटर टारगेट किए जा रहे हैं। उन्होंने सभ्यता और संस्थानों पर भरोसा जगाने के बजाय सीधे चुनाव आयोग और सरकार पर सवाल खड़े किए।
राहुल ने कर्नाटक के अलंद निर्वाचन क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि किसी ने कम-से-कम 6,018 वोट हटाने की कोशिश की — और उनकी जांच में यह संख्या इससे अधिक होने का संदेह है। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर बूथ लेवल अधिकारी ने अपने ही चाचा का वोट गायब पाया, जब उसने कारण पूछा तो पता चला कि वोट हटाने के पीछे एक पड़ोसी भी नहीं जानता — यह दर्शाता है कि वॉटर्स के रिकॉर्ड किसी अन्य शक्ति द्वारा हाईजैक किए जा रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि जांच में यह संकेत मिला कि वोट डिलीट करने की प्रक्रिया केंद्रीकृत (सेंट्रलाइज़्ड) तरीके से ऑटोमैटिक फाइलिंग के ज़रिए हो रही है। राहुल ने दावा किया कि मोबाइल नंबर कर्नाटक के होने के बजाय दूसरे राज्यों के नंबर इस्तेमाल किए जा रहे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह एक लक्षित (टार्गेटेड) प्रयास था।
राहुल ने दो व्यक्तिगत उदाहरण भी साझा किए — एक केस में किसी गोदाबाई के नाम से 12 वोटर्स हटा दिए गए, जबकि उन्हें कुछ नहीं पता था; दूसरे केस में सूर्यकांत नामक व्यक्ति से जुड़ा मामला बताया गया, जहाँ 14 मिनट में 12 वोट डिलीट किए गए। उन्होंने यह भी कहा कि नागराज नाम के एक शख्स ने 36 सेकंड में दो फॉर्म भर दिए — यह सब सुबह-समय पर फाइलिंग कर हुए पाए गए।
जब उनसे पूछा गया कि क्या वे इस पर कोर्ट या किसी एजेंसी में शिकायत करेंगे, तो राहुल ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा संस्थाओं का काम है — लेकिन जब संस्थाएँ अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रही हैं तो उन्हें यह आवाज उठानी पड़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग के भीतर से कुछ मदद मिलने लगी है और आगे और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
सूचना-पटुता की मांग और पारदर्शिता की आवाज़ उठाते हुए राहुल का कहना रहा कि यह मामला केवल तकनीकी गड़बड़ी नहीं बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की गंभीर चुनौती है — और इसके ठोस सबूतों का खुला और त्वरित संयुक्त जांच के ज़रूरत है।

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