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गाज़ा पर ट्रंप का बड़ा दांव: युद्ध विराम, इजराइली सेना की वापसी और नए प्रशासन का खाका आज UN में पेश करेंगे l

गाज़ा पर ट्रंप का बड़ा दांव: युद्ध विराम, इजराइली सेना की वापसी और नए प्रशासन का खाका आज UN में पेश करेंगे l

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज संयुक्त राष्ट्र महासभा में गाज़ा संकट को लेकर एक बड़ा प्रस्ताव पेश करने जा रहे हैं। उनकी इस योजना पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं, खासकर अरब और मुस्लिम देशों की। लंबे समय से जारी गाज़ा-इजराइल संघर्ष ने हजारों निर्दोष लोगों की जान ले ली है और कई देशों को सीधे या परोक्ष रूप से प्रभावित किया है। ऐसे में ट्रंप एक ठोस शांति योजना के साथ आ रहे हैं जिसे वे “स्थायी समाधान” की दिशा में पहला कदम बता रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक ट्रंप की योजना तीन मुख्य बिंदुओं पर आधारित हो सकती है—

गाज़ा में तुरंत और व्यापक युद्धविराम लागू करना।

इजराइली सेना की चरणबद्ध वापसी ताकि मानवीय संकट कम हो।

हमास के बिना गाज़ा में एक नया प्रशासनिक ढांचा बनाना, जिसमें अरब और मुस्लिम देशों की अहम भूमिका होगी।

इस पूरी कोशिश का मकसद गाज़ा को हिंसा के चक्र से निकालकर स्थायी शांति की दिशा में ले जाना है।

ट्रंप की योजना में एक खास बिंदु अरब और मुस्लिम राष्ट्रों की सक्रिय भागीदारी है। प्रस्ताव में यह सुझाव भी शामिल हो सकता है कि गाज़ा के प्रशासन की निगरानी के लिए अरब लीग और संयुक्त राष्ट्र की संयुक्त संरचना बने। इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय भरोसा बढ़ेगा बल्कि गाज़ा के लोगों को स्थिर प्रशासन भी मिलेगा

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप शांति योजना के जरिए मुस्लिम देशों के साथ रिश्ते बेहतर करने की रणनीति पर भी काम कर रहे हैं। खुद को एक डीलमेकर के रूप में पेश करने वाले ट्रंप पहले भी अब्राहम समझौते जैसे प्रयासों में शामिल रहे हैं, लेकिन गाज़ा का मसला कहीं ज्यादा जटिल और संवेदनशील है।
सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि इजराइल और हमास, दोनों ही इस प्रस्ताव पर कैसे प्रतिक्रिया देंगे। इजराइल सुरक्षा चिंताओं के कारण सेना हटाने के फैसले पर सहज नहीं होगा, जबकि हमास को प्रशासन से बाहर करने का कदम उनके समर्थकों में नई नाराजगी भड़का सकता है।

संयुक्त राष्ट्र मंच से ट्रंप का संबोधन मुख्य रूप से वहां पैदा हुए भीषण मानवीय संकट पर केंद्रित होगा। गाज़ा में अस्पताल, बिजली आपूर्ति और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित हैं। हजारों परिवार अपने घरों से बेघर हो चुके हैं और लाखों लोग अब भी राहत शिविरों में ठुके हुए हैं।

कई अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह प्रस्ताव सफल हुआ तो मिडिल ईस्ट में स्थिरता की दिशा में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। हालांकि स्केलेबल और स्वीकार्य समाधान की कमी के कारण किसी भी शांति समझौते को लागू करना आसान नहीं होगा।

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