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कानपुर के करोड़पति कानूनगो की 41 संपत्तियां आईं सामने, गलती पड़ी भारी, डीएम ने किया डिमोशन कर लेखपाल बनाया l

कानपुर के करोड़पति कानूनगो की 41 संपत्तियां आईं सामने, गलती पड़ी भारी, डीएम ने किया डिमोशन कर लेखपाल बनाया l

यूपी के कानपुर में तहसील प्रशासन का एक कानूनगो, आलोक दुबे, करोड़ों की संपत्तियों का मालिक निकला। जांच में सामने आया कि उसके पास 41 संपत्तियों का रिकॉर्ड है, लेकिन एक बड़ी गलती ने उसकी मुश्किलें बढ़ा दीं। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने डीएम के आदेश पर आलोक दुबे को कानूनगो के पद से डिमोट कर लेखपाल बना दिया है। इसके साथ ही सेवा पुस्तिका में निंदा दर्ज कराई गई है और उसके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ है।

जांच में खुलासा हुआ कि आलोक दुबे ने विवादित जमीनों के अवैध बैनामा और वरासत करार कराकर करोड़ों का लाभ उठाया। विशेष तौर पर सिंहपुर कठार और रामपुर भीमसेन की जमीनें, जो कोर्ट में विचाराधीन थीं, उन पर बिना वैधानिक अनुमति संपत्ति की खरीद-फरोख्त की गई। 11 मार्च 2024 को वरासत दर्ज करवाने के बाद इन जमीनों को 19 अक्टूबर 2024 को एक निजी कंपनी को बेच दिया गया।

जांच समिति ने पाया कि यह मामला पद के दुरुपयोग, मिलीभगत और हितों के टकराव का है। आलोक दुबे की संलिप्तता 41 संपत्तियों तक पाई गई है। इस मामले में क्षेत्रीय लेखपाल अरुणा द्विवेदी की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जिसके कारण उन्हें निलंबित किया जा चुका है।

जिलाधिकारी ने कहा कि राजस्व अभिलेखों में छेड़छाड़ और साठगांठ जनता के विश्वास को तोड़ने वाला अपराध है। ऐसे किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी जो सरकारी प्रणाली में भ्रष्टाचार करता है। आलोक दुबे के खिलाफ एसडीएम स्तर पर अनुशासनात्मक प्रक्रिया जारी है और जल्द ही चार्जशीट दायर की जाएगी।

इस कार्रवाई से प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी स्तर पर हो रहे भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह केस जनता के विश्वास बहाल करने और अधीनस्थ कर्मचारियों में अनुशासन कायम रखने का उदाहरण माना जा रहा है।

कानपुर में कानूनगो आलोक दुबे की 41 संपत्तियों का खुलासा और उनकी गिरफ़्तारी तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई की मिसाल है। भ्रष्टाचार, पद का दुरुपयोग और कानूनी उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तीव्र कार्रवाई जारी रहेगी।

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