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दीपावली पर मिट्टी की खुशबू लेकर लौटा माटीकला महोत्सव 2025: परंपरा, तकनीक और रोजगार का संगम

दीपावली पर मिट्टी की खुशबू लेकर लौटा माटीकला महोत्सव 2025: परंपरा, तकनीक और रोजगार का संगम

लखनऊ में शुक्रवार को माटीकला महोत्सव 2025 की शुरुआत हुई। खादी भवन में हुए इस कार्यक्रम का उद्घाटन उत्तर प्रदेश सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री राकेश सचान ने किया। दीपावली के खास मौके पर आयोजित यह महोत्सव 10 दिन तक चलेगा, यानी 10 से 19 अक्टूबर तक लोग मिट्टी से बने आकर्षक और उपयोगी उत्पादों की खरीदारी कर सकेंगे।

इस मौके पर माटीकला बोर्ड द्वारा बनाए गए एक नए डिजिटल पोर्टल और ई-वेरिफिकेशन मोबाइल ऐप को भी लॉन्च किया गया। इन तकनीकी पहल से कारीगरों का काम और आसान हो सकेगा और सरकारी योजनाओं का लाभ जल्दी और पारदर्शी तरीके से मिलेगा। कार्यक्रम में कई कारीगरों को लाभ भी दिया गया। 10 लोगों को मुफ्त बिजली से चलने वाला चाक मिला, 2 को पगमिल मशीनें दी गईं और 2 लाभार्थियों को ऋण के चेक दिए गए, ताकि वे अपना खुद का व्यवसाय शुरू कर सकें या आगे बढ़ा सकें।

महोत्सव में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए कारीगरों को 50 मुफ्त दुकानें दी गई हैं। इन दुकानों में पारंपरिक मिट्टी के दीपक, खिलौने, बर्तन और सजावटी सामान रखे गए हैं। कुछ उत्पादों में आधुनिक डिजाइन और तकनीक का भी उपयोग किया गया है, जिससे ये सामान और भी खास बन गए हैं।

मंत्री राकेश सचान ने बताया कि मिट्टी से बनी वस्तुओं का चलन हमारे समाज में बहुत पुराना है। आज भी हजारों लोग इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं और अपने परिवार का पालन-पोषण इसी काम से कर रहे हैं। सरकार ने साल 2018 में माटीकला बोर्ड बनाया था ताकि इस पारंपरिक कला को संरक्षित किया जा सके और ज्यादा से ज्यादा लोगों को इससे रोजगार मिल सके। अब तक राज्य में करीब 48 हजार कारीगरों की पहचान की जा चुकी है और 37 हजार से ज्यादा को मिट्टी निकालने के लिए पट्टा दिया गया है।

सरकार की योजनाओं के तहत अब तक लगभग 16 हजार बिजली चालित चाक और सैकड़ों पगमिल मशीनें बांटी जा चुकी हैं। इस साल 2,500 चाक और 300 पगमिल देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा कारीगरों को दीया बनाने की मशीनें, पेंटिंग मशीनें और पीओपी की डाई भी दी गई हैं, ताकि वे ज्यादा और बेहतर सामान बना सकें।

सरकार ने रोजगार को बढ़ावा देने के लिए कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) भी बनाए हैं, जहां कारीगरों को काम करने के लिए जरूरी संसाधन एक ही जगह मिलते हैं। अभी तक 6 सेंटर खुल चुके हैं और 3 और जगहों—अमेठी, बरेली और बिजनौर में नए सेंटर बनाए जा रहे हैं।

अब तक करीब 1,100 से ज्यादा लोगों को माटीकला रोजगार योजना के तहत ऋण देकर उनका व्यवसाय शुरू कराया गया है। इस साल 300 और नई इकाइयां शुरू करने का लक्ष्य है। इसके साथ-साथ सरकार ने हजारों कारीगरों को तकनीकी और शिल्पकारी से जुड़ा प्रशिक्षण भी दिया है।

इस कार्यक्रम में माटीकला बोर्ड और खादी ग्रामोद्योग के अधिकारी, कर्मचारी, नोडल अधिकारी संजय कुमार पांडे और महाप्रबंधक शिशिर भी शामिल हुए। महोत्सव में शामिल कारीगरों और आने वाले ग्राहकों के लिए यह आयोजन रोजगार, परंपरा और नवाचार का सुंदर संगम बनकर सामने आया है।

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