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नेपाल में Gen-Z आंदोलन का बड़ा असर, पांच बार के पूर्व पीएम शेर बहादुर देउबा ने राजनीति से लिया ब्रेक l

नेपाल में Gen-Z आंदोलन का बड़ा असर, पांच बार के पूर्व पीएम शेर बहादुर देउबा ने राजनीति से लिया ब्रेक l

नेपाल की सियासत में जेनरेशन-जेड आंदोलन ने भूचाल ला दिया है। पांच बार प्रधानमंत्री रह चुके शेर बहादुर देउबा ने 14 अक्टूबर 2025 को कांग्रेस पार्टी की कार्यकारी भूमिका से खुद को अलग कर लंबा ब्रेक लेने का फैसला किया है। उन्होंने नेपाल कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष उप सभापति पूर्ण बहादुर खड़का को नियुक्त किया है, जो अब पार्टी के बड़े फैसले लेने के जिम्मेदार होंगे।

देउबा को नेपाल के सबसे प्रभावशाली नेताओं में माना जाता रहा है। परंतु Jएन-जेड आंदोलन के बाद पार्टी में उनकी नेतृत्व क्षमता और उम्र को लेकर तेज विवाद हुआ, जिसके चलते वे जल्द ही मजबूरन पद से पीछे हट गए। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वह पार्टी अध्यक्ष पद के लिए कैंडिडेट नहीं होंगे और एक नए नेतृत्व को मौका देना पार्टी हित में है।

नेपाल में फरवरी 2026 में आम चुनाव प्रस्तावित हैं, आने वाले इस लोकतांत्रिक संघर्ष के बीच यह बदलाव राजनीतिक स्थितियों को और जटिल बनाएगा। देउबा के राजनीतिक करियर की लंबी दौड़ में यह कार्यकारी पद से उनका अंतिम दिन माना जा रहा है, हालांकि वे अभी भी पार्टी के सभापति बने हुए हैं।

कार्यकारी भूमिका छोड़ने के बावजूद, देउबा ने पार्टी की उपलब्धियों और चुनौतियों को याद करते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए सभी दलों से एकजुट होने का आग्रह किया। पार्टी में गगन थापा जैसे युवा नेता भी तेजी से उभर रहे हैं, जो जेनरेशन-जेड आंदोलन में काफी सक्रिय रहे।

इस बदलाव से नेपाली कांग्रेस की आगामी दिशा और चुनाव रणनीति महत्वपूर्ण मोड़ पर है। राजनीति के इस नए दौर में नेपाल के लिए समवेत और प्रभावशाली नेतृत्व की आवश्यकता है।

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