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इज़राइल ने तुर्की के सैनिकों को गाजा में प्रवेश देने से किया इनकार — Donald Trump की शांतिप्रस्तावित योजना में पैदा हुई बड़ी दरार l

इज़राइल ने तुर्की के सैनिकों को गाजा में प्रवेश देने से किया इनकार — Donald Trump की शांतिप्रस्तावित योजना में पैदा हुई बड़ी दरार l

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा पेश की गई 20-बिंदुओं वाली शांति योजना का एक अहम हिस्सा था कि Gaza Strip में एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (International Stabilization Force) तैनात किया जाए, जो एक तरफ वहां के संघर्ष विराम को बनाए रखेगा, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में पुनरुद्धार व सुरक्षा व्यवस्था को आगे बढ़ाएगा।

अमेरिका ने इस दल में कई देशों को शामिल करने का प्रयास किया — जिनमें Turkey भी शामिल था।

लेकिन इस प्रस्ताव पर अब एक बहुत बड़ी चूक सामने आई है।

इज़राइल का विरोध: तुर्की-सैन्य दल को नहीं होगी अनुमति
Government of Israel के विदेशमंत्री Gideon Saar ने स्पष्ट स्वर में कहा है कि इज़राइल तुर्की के सशस्त्र बलों को गाजा में तैनात होने की अनुमति नहीं देगा।

उन्होंने तुर्की पर यह आरोप लगाया कि उसका रवैया इज़राइल-हमी की ओर झुका हुआ है तथा युद्ध के समय तुर्की की आलोचनात्मक भूमिकाएँ रही हैं। Saar ने कहा, “यह हमारे अमेरिका-मित्रों को बताया जा चुका है कि हमें ऐसी फौजी उपस्थिति स्वीकार्य नहीं है जिसकी तटस्थता पर हम भरोसा नहीं कर सकते।”

इसके साथ ही, अमेरिकी विदेश मंत्री रायबो (Marco Rubio) ने भी कहा कि इस स्थिरीकरण बल को उन देशों द्वारा बनाया जाना चाहिए, जिन पर इज़राइल सहज रूप से भरोसा कर सके।

तुर्की के राष्ट्रपति Recep Tayyip Erdoğan ने कहा है कि अमेरिका को इज़राइल पर अधिक दबाव बनाना चाहिए ताकि ट्रम्प की शांति योजना के वादे पूरे हों। उन्होंने तुर्की-इज़राइल रिश्तों में तनाव को सामने रखते हुए, यह सुझाव दिया कि तुर्की को इस प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए।

तुर्की का कहना है कि वह गाजा में मानव-सहायता, पुनरुद्धार तथा स्थिरता स्थापना में भाग लेना चाहता है, लेकिन इज़राइल का विरोध इसके मार्ग में बड़ी बाधा बना हुआ है।

इस मोर्चे पर यह स्पष्ट हो गया है कि ट्रम्प की शांति योजना जितनी हस्ताक्षरित दिखती है, उसे लागू करना उतना आसान नहीं है — अहम देश, विशेष रूप से इज़राइल, यह तय कर रहा है कि किस देश की सैन्य भागीदारी स्वीकार्य है और किसका नहीं।

तुर्की को इस तरह बाहर कर देने से यह संकेत जाता है कि इज़राइल को लगता है कि उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता — विशेषकर तुर्की-हमास सम्बन्धों और तुर्की की मध्य-पूर्व में सक्रिय भूमिका के कारण।

इस कदम से क्षेत्रीय राजनीति में एक नई जटिलता आई है: अमेरिका की मध्यस्थता के बावजूद, स्थानीय राष्ट्रों की स्वीकृति और सामरिक हित निर्णायक साबित हो रहे हैं।

तुर्की की भूमिका कम होने से, गाजा में पुनरुद्धार तथा स्थिरता प्रक्रिया में उसकी उपस्थिति व भूमिका सीमित हो सकती है — जिससे तुर्की-मध्य-पूर्व नीति पर प्रश्न चिह्न लग सकते हैं।

ट्रम्प प्रशासन को यह तय करना होगा कि गाजा में स्थिरीकरण बल के लिए किन देशों को शामिल किया जाए, जिन्हें इज़राइल स्वीकार्य हो।

तुर्की-इज़राइल रिश्तों में यह घटना एक नया तनाव उत्पन्न कर सकती है, तथा तुर्की की मध्य-पूर्व नीति को पुनर्विचार की जरूरत पड़ सकती है।

गाजा में मानव-सहायता, पुनरुद्धार तथा सुरक्षा व्यवस्था की चुनौतियाँ अब और जटिल हो गई हैं, क्योंकि एक प्रमुख मुस्लिम देश को बाहर रखा गया है।

यह देखना होगा कि क्या तुर्की मोर्चे से पूर्णतः हट जाता है या फिर केवल सैन्य भागीदारी से हटकर अन्य भूमिका (ह्यूमैनिटेरियन, निर्माण आदि) निभाता है।

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