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‘जय श्री राम’ के जवाब में अखिलेश का ‘जय भीम, जय समाजवाद’, यूपी सियासत में बदला नैरेटिव

‘जय श्री राम’ के जवाब में अखिलेश का ‘जय भीम, जय समाजवाद’, यूपी सियासत में बदला नैरेटिव

उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर धार्मिक पहचान बनाम सामाजिक न्याय की बहस तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक टीवी कार्यक्रम के दौरान जब उनसे ‘जय श्री राम या जय श्री कृष्ण’ कहने को कहा गया, तो उन्होंने माइक उठाकर जवाब दिया— “जय भीम, जय समाजवाद”। इस एक पंक्ति ने यूपी की राजनीति में नया संकेत दे दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नारा केवल प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि सपा की आने वाले चुनावों की रणनीति का हिस्सा है, जिसमें दलित और पिछड़े वर्ग को एकजुट करने की कोशिश साफ दिखाई देती है।

अखिलेश यादव का यह बयान उनकी PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) राजनीति की दिशा को और स्पष्ट करता है। ‘जय भीम’ को पहले रखकर उन्होंने सीधे तौर पर डॉ. भीमराव अंबेडकर की विचारधारा और दलित समाज को संबोधित किया है। ऐसे समय में जब बहुजन समाज पार्टी कमजोर पड़ती नजर आ रही है और दलित वोट बैंक बिखरा हुआ है, सपा प्रमुख खुद को उस खाली राजनीतिक स्पेस में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका संदेश साफ है कि धार्मिक नारों के मुकाबले वे सामाजिक न्याय और समाजवाद की राजनीति को आगे रखेंगे।

इसी कार्यक्रम में अखिलेश यादव ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जुड़े एक विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी। हाल ही में एक वीडियो सामने आया था, जिसमें नीतीश कुमार एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान एक मुस्लिम महिला का बुर्का हटाते नजर आए। इस पर विपक्षी दलों ने तीखी आलोचना की। हालांकि अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर बेहद संयमित टिप्पणी करते हुए कहा कि यह “उम्र का असर” हो सकता है और बुजुर्ग लोगों को ऐसे कार्यक्रमों में सहयोगी की जरूरत होती है, जो उन्हें समय पर समझा सके। इस बयान के जरिए उन्होंने जहां सीधे टकराव से बचते हुए नीतीश पर हल्का तंज कसा, वहीं अपनी राजनीतिक संतुलन की छवि भी बनाए रखी।

इसी बीच अयोध्या से जुड़ी एक अहम खबर ने सियासी माहौल को भावनात्मक रंग भी दिया। राम जन्मभूमि आंदोलन के अग्रणी नेता और पूर्व सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती के निधन के बाद उनके अंतिम दर्शन के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या पहुंचे। मुख्यमंत्री योगी ने वेदांती को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका पूरा जीवन रामलला के भव्य मंदिर निर्माण और अयोध्या धाम के विकास को समर्पित रहा। उन्होंने इसे संयोग बताया कि वेदांती ने श्रीराम कथा का वाचन करते हुए ही देह त्यागी।

इस तरह एक ओर जहां अखिलेश यादव ‘जय भीम, जय समाजवाद’ के जरिए हिंदुत्व की राजनीति के समानांतर सामाजिक न्याय का नैरेटिव गढ़ते दिखे, वहीं दूसरी ओर योगी आदित्यनाथ राम मंदिर आंदोलन के पुरोधा को श्रद्धांजलि देकर अपनी वैचारिक धारा को और मजबूत करते नजर आए। साफ है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में विचारधाराओं की यह टकराहट आने वाले चुनावों में और तेज होने वाली है।

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