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UGC विवाद पर जंतर-मंतर से गरजे चंद्रशेखर आजाद, सभी दलों के अध्यक्षों को दी खुली बहस की चुनौती

UGC विवाद पर जंतर-मंतर से गरजे चंद्रशेखर आजाद, सभी दलों के अध्यक्षों को दी खुली बहस की चुनौती

दिल्ली के जंतर-मंतर पर 11 फरवरी 2026 को भीम आर्मी चीफ और आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर आजाद ने यूजीसी के नए नियमों के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने लोकसभा में प्रतिनिधित्व रखने वाली सभी राजनीतिक पार्टियों के राष्ट्रीय अध्यक्षों को खुले मंच पर बहस की चुनौती दे दी। उन्होंने कहा कि वे मुसलमानों, ईसाइयों, सिखों, दलितों, पिछड़ों और किसानों के अधिकारों पर किसी भी मंच से चर्चा करने को तैयार हैं और इस मुद्दे को संसद में भी मजबूती से उठाएंगे।

प्रदर्शन के दौरान चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि वे जमीन से जुड़े नेता हैं और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर खुली बहस से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय परिसरों में आज भी बड़े पैमाने पर जातिगत भेदभाव मौजूद है। उनका कहना था कि जब तक कुलपतियों और चयन समितियों में दलितों और पिछड़े वर्गों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं होगा, तब तक भेदभाव को जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता।

दरअसल, यह विवाद यूजीसी रेगुलेशन 2026 को लेकर है, जिसे 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित किया गया था। इन नए नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में एससी (SC), एसटी (ST) और ओबीसी (OBC) छात्रों के साथ होने वाले जातिगत भेदभाव को रोकना बताया गया है। हालांकि, सामान्य वर्ग के कुछ छात्रों और संगठनों ने इसका विरोध करते हुए दावा किया कि ये नियम केवल आरक्षित वर्गों को सुरक्षा देते हैं और सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए समान प्रावधान नहीं हैं। साथ ही, कथित तौर पर झूठी शिकायतों पर दंड के प्रावधान की कमी को लेकर भी सवाल उठाए गए।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी 2026 को नए नियमों पर स्टे लगा दिया है और फिलहाल 2012 के पुराने नियमों को प्रभावी बनाए रखने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को निर्धारित है।

जंतर-मंतर से उठी यह आवाज अब राजनीतिक बहस का रूप ले चुकी है। एक ओर जहां चंद्रशेखर आजाद इन नियमों को सामाजिक न्याय की दिशा में जरूरी कदम बता रहे हैं, वहीं विरोधी पक्ष इसे असंतुलित मान रहा है। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और संसद में इस मुद्दे पर होने वाली संभावित बहस पर टिकी है।

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