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योगी मंत्रिमंडल विस्तार टला, मंत्री बनने का इंतजार कर रहे विधायकों को झटका

योगी मंत्रिमंडल विस्तार टला, मंत्री बनने का इंतजार कर रहे विधायकों को झटका

उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से चर्चा में चल रहा योगी मंत्रिमंडल विस्तार फिलहाल टलता हुआ दिखाई दे रहा है। प्रदेश में मंत्री बनने की उम्मीद लगाए बैठे कई विधायकों को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि उनका इंतजार अब और बढ़ गया है। पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि होली के आसपास मंत्रिमंडल में बदलाव की घोषणा हो सकती है, लेकिन अब यह संभावना कम होती नजर आ रही है। ताजा राजनीतिक घटनाक्रम के अनुसार, अब उत्तर प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार कम से कम दो महीने के लिए टल गया है और यह बदलाव मई या उसके बाद ही संभव माना जा रहा है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस समय अन्य राज्यों की राजनीति में पूरी तरह व्यस्त है। सूत्रों के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व फिलहाल पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों की तैयारियों और रणनीति पर पूरा ध्यान दे रहा है। इसके साथ ही बिहार में सरकार गठन और मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही राजनीतिक गतिविधियों ने भी दिल्ली के नेतृत्व का फोकस अपनी ओर खींच लिया है। ऐसे में पार्टी आलाकमान का मानना है कि इन महत्वपूर्ण चुनावी परिस्थितियों के बीच उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार करना संगठनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा और आरएसएस (RSS) आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए बहुत सावधानी के साथ फैसले ले रहे हैं। पार्टी की कोशिश है कि जब भी मंत्रिमंडल का विस्तार हो, वह जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को संतुलित करने वाला हो, जिससे चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल को अपने पक्ष में किया जा सके। इससे पहले भी 2022 के विधानसभा चुनाव से लगभग छह महीने पहले, यानी सितंबर 2021 में मंत्रिमंडल विस्तार किया गया था। माना जा रहा है कि इस बार भी पार्टी उसी तरह की रणनीति अपना सकती है।

मौजूदा स्थिति पर नजर डालें तो 25 मार्च 2022 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत 53 मंत्रियों के साथ हुई थी। हालांकि बाद में कुछ बदलावों के कारण मंत्रिमंडल में जगह खाली हो गई। उदाहरण के तौर पर, कैबिनेट मंत्री जितिन प्रसाद अब केंद्र सरकार में मंत्री बन चुके हैं, जबकि राज्य मंत्री अनूप प्रधान वाल्मीकि सांसद बन गए हैं। नियमों के अनुसार, उत्तर प्रदेश विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के आधार पर राज्य में अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इस हिसाब से अभी भी लगभग 9 से 10 मंत्री पद खाली हैं।

माना जा रहा है कि जब भी मंत्रिमंडल विस्तार होगा, तब केवल नए चेहरों को ही शामिल नहीं किया जाएगा बल्कि कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभागों में भी फेरबदल हो सकता है। फिलहाल मंत्री बनने की दौड़ में शामिल कई विधायकों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा और उन्हें पार्टी नेतृत्व के अगले फैसले तक धैर्य बनाए रखना होगा।

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