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भारतीय वायुसेना की रिकॉर्ड बुक में दर्ज हुआ स्क्वाड्रन लीडर सान्या का नाम

भारतीय वायुसेना की रिकॉर्ड बुक में दर्ज हुआ स्क्वाड्रन लीडर सान्या का नाम

भारतीय वायुसेना की महिला अधिकारी स्क्वाड्रन लीडर सान्या ने इतिहास रचते हुए एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसने पूरे देश को गर्व महसूस कराया है। सान्या भारतीय वायुसेना में ‘कैटेगरी-ए क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर (QFI)’ रेटिंग पाने वाली पहली महिला अधिकारी बन गई हैं। यह रेटिंग वायुसेना में फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स को मिलने वाला सर्वोच्च सम्मान और रैंक माना जाता है। उनकी इस उपलब्धि के साथ उनका नाम भारतीय वायुसेना के रिकॉर्ड बुक में दर्ज हो गया है।

भारतीय वायुसेना ने सोमवार को आधिकारिक तौर पर इस उपलब्धि की घोषणा की। वायुसेना ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसे गौरव का क्षण बताते हुए कहा कि स्क्वाड्रन लीडर सान्या की सफलता उनकी मेहनत, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है। वायुसेना ने कहा कि उनकी यह उपलब्धि देशभर के युवाओं, खासकर लड़कियों के लिए प्रेरणा बनेगी, जो भविष्य में सेना और विमानन क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहती हैं।

स्क्वाड्रन लीडर सान्या भारतीय वायुसेना की बेहद कुशल और अनुभवी पायलट मानी जाती हैं। जून 2015 में उन्हें भारतीय वायुसेना की फ्लाइंग ब्रांच में कमीशन मिला था। वह पायलटों के लिए आयोजित 42वें शॉर्ट सर्विस कमीशन (वुमेन) कोर्स का हिस्सा थीं, जिसमें कुल छह महिला अधिकारी शामिल थीं। बाद में जून 2021 में उन्हें स्क्वाड्रन लीडर के पद पर पदोन्नत किया गया।

सान्या को मिली ‘कैटेगरी-ए QFI’ रेटिंग भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ट्रेनिंग से जुड़ी सबसे प्रतिष्ठित उपलब्धियों में से एक मानी जाती है। इस रेटिंग के बाद वह न केवल नए पायलटों को विमान उड़ाने की ट्रेनिंग दे सकेंगी, बल्कि अन्य फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स की क्षमता का मूल्यांकन भी कर पाएंगी। यह जिम्मेदारी केवल बेहद अनुभवी और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को ही दी जाती है।

इस स्तर का फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर बनने के लिए चेन्नई के तांबरम स्थित एयर फोर्स स्टेशन में मौजूद फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स स्कूल से कठिन प्रशिक्षण लेना पड़ता है। यह कोर्स करीब 22 हफ्तों का होता है, जिसमें 200 घंटे से ज्यादा की पढ़ाई और लंबी उड़ान ट्रेनिंग शामिल होती है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रदर्शन के आधार पर इंस्ट्रक्टर्स को अलग-अलग ग्रेड दिए जाते हैं और उसी के अनुसार उनकी रेटिंग तय होती है।

भारतीय वायुसेना में महिलाओं के लिए अवसरों का विस्तार धीरे-धीरे हुआ है। साल 1994 में पहली बार महिलाओं को वायुसेना में हेलीकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट विमान उड़ाने की अनुमति दी गई थी। इसके बाद 2016 में महिलाओं को लड़ाकू विमान उड़ाने की भी मंजूरी मिली। शुरुआती दौर में महिलाएं केवल चीता, चेतक और एएन-32 जैसे विमान उड़ाती थीं, लेकिन अब महिला पायलट राफेल और सुखोई-30 जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों को भी संचालित कर रही हैं।

स्क्वाड्रन लीडर सान्या की यह उपलब्धि भारतीय वायुसेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और क्षमता का मजबूत उदाहरण मानी जा रही है। उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया है कि आज भारतीय महिलाएं देश की सुरक्षा और सैन्य नेतृत्व के हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रही हैं।

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