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राम मंदिर दान विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, CJI से स्वतंत्र जांच की मांग

राम मंदिर दान विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, CJI से स्वतंत्र जांच की मांग

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान राशि में कथित गड़बड़ी और चोरी के आरोपों का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। इस मामले में अधिवक्ता अनूप अवस्थी ने देश की सर्वोच्च अदालत से स्वतः संज्ञान लेने की मांग करते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की गुहार लगाई है। याचिका में कहा गया है कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान से जुड़े आरोपों की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई जाए, ताकि जनता का भरोसा बना रहे और यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई हो तो उसकी सच्चाई सामने आ सके।

मामले की सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के समक्ष मौखिक उल्लेख करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने वकीलों से अनुरोध किया कि ऐसे मामलों में मौखिक मेंशनिंग के बजाय लिखित नोट प्रस्तुत किया जाए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत पहले से सूचीबद्ध मामलों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुन रही है और प्रस्तुत किए गए नोट के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।

इस बीच, उत्तर प्रदेश सरकार ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। बताया गया है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर यह टीम बनाई गई है। एसआईटी को दानपात्रों और दान राशि से जुड़े आरोपों की जांच कर सरकार को विस्तृत रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी दी गई है।

जांच दल में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस. तथा वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया है। सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया पर फैल रही चर्चाओं और आरोपों के बीच मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि तथ्य सामने आ सकें और श्रद्धालुओं के मन में किसी प्रकार का भ्रम न रहे।

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने एसआईटी गठन का स्वागत करते हुए कहा कि इतनी तेजी से जांच का निर्णय लिया जाना सराहनीय कदम है। उन्होंने विश्वास जताया कि जांच में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी और इससे भविष्य में व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं का विश्वास सर्वोपरि है और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी।

हालांकि, दान राशि में कथित गड़बड़ी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए नृपेंद्र मिश्रा ने स्पष्ट किया कि उनकी भूमिका केवल मंदिर निर्माण कार्यों की निगरानी तक सीमित है। उन्होंने कहा कि वह निर्माण संबंधी परियोजनाओं की देखरेख करते हैं और वित्तीय मामलों पर टिप्पणी करना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

उधर, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि यदि भगवान राम के नाम पर श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान में किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए हैं और मामले की पारदर्शी जांच की मांग की है।

वहीं, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर को लेकर अफवाहें फैलाकर भ्रम पैदा करने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल एसआईटी जांच और सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हुई है, जिससे पूरे विवाद की सच्चाई सामने आ सके।

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