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बिजली कर्मचारियों की हुई जीत,यूपी बिजली विभाग के निजीकरण पर फैसला टला

बिजली कर्मचारियों की हुई जीत,यूपी बिजली विभाग के निजीकरण पर फैसला टला

लखनऊ – उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग के निजीकरण का विरोध कर रहे कर्मचारियों के आगे सरकार झुकती नज़र आ रही है,पिछले दो दिनों से हड़ताल की वजह से कई जिलों में बिजली की समस्या बढ़ गयी थी,जिसकी वजह से कई इलाकों में पावर सप्लाई ठप हो गयी. इस मामले को सुलझाने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को आगे आना पड़ा, इस मामले में एक अहम बैठक हुई,इस बैठक में फिलहाल निजीकरण के निर्णय को स्थगित कर दिया गया है. अब 3 महीने बाद इसकी समीक्षा की जाएगी. सरकार का कहना है कि सुधारों के मुताबिर आगे की रूपरेखा तय की जाएगी

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यूपी में बिजली कर्मचारियों की चल रही हड़ताल को लेकर योगी सरकार पर हमला बोला. अखिलेश यादव ने कहा, यूपी में 15 लाख विद्युतकर्मी हड़ताल पर चले गए हैं. भाजपा सरकार निजीकरण की आड़ में रोजगार खत्म कर रही है. उन्होंने मांग की कि सरकार यह प्रस्ताव वापस ले. उन्होंने कहा,साढ़े तीन वर्षों में एक यूनिट बिजली का उत्पादन नहीं हुआ. विद्युत आपूर्ति गांव में लगभग 10 घंटा और शहरों में 15 घंटा से ज्यादा कभी नहीं मिल पाई, उपभोक्ताओं को लम्बे-लम्बे बिल पकड़ाकर परेशान किया जा रहा है. राजधानी लखनऊ में भी बिजली की आवाजाही बढ़ गई है. पानी की किल्लत भी है.

निजीकरण के खिलाफ बिजली कर्मियों ने कार्य बहिष्कार का ऐलान किया था. इसके बाद सरकार की कैबिनेट सब कमेटी ने आंदोलित बिजली कर्मियों से बात की. सरकार का कहना है कि, उत्तर प्रदेश सरकार सबको बिजली ,पर्याप्त बिजली,निर्बाध बिजली के ध्येय वाक्य पर कम कर रही है.uppcl और उसके सहयोगी निगमों द्वारा उपभोक्ता सेवाओं को बेहतर बनाने, अधिकतम सेवाओं को ऑनलाइन माध्यमों से उपलब्ध कराने व सही बिल समय पर बिल उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार प्रयास किया जा रहा है. सरकार ने विद्युत विभाग के सभी अधिकारियों, कर्मचारियों से अपील है कि प्रदेश की जनता के हितों और विभाग के उज्जवलमय भविष्य को ध्यान में रखते हुए कार्य बहिष्कार, हड़ताल जैसी कोई कार्रवाई न करें. प्रदेश की जनता से अपील है कि समिति की ऐसी किसी गैर क़ानूनी हड़ताल और कार्य बहिष्कार का सरकार द्वारा सामना करने की स्थिति में धैर्य बनाए रखें और सहयोग करें.

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