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महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और एमपी के बीच बड़ा समझौता, सरदार सरोवर परियोजना को मिली नई रफ्तार

महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और एमपी के बीच बड़ा समझौता, सरदार सरोवर परियोजना को मिली नई रफ्तार

नई दिल्ली: सरदार सरोवर बांध परियोजना से जुड़े लंबे समय से लंबित नर्मदा अवॉर्ड भुगतान विवाद का समाधान हो गया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के साथ ही वर्षों से लंबित भुगतान संबंधी विवाद समाप्त हो गया, जिसे सहकारी संघवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

नई दिल्ली में आयोजित बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मौजूद रहे। चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने आपसी सहमति से समझौते पर हस्ताक्षर किए। बैठक में केंद्र सरकार और संबंधित राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।

समझौते के बाद अमित शाह ने कहा कि नर्मदा अवॉर्ड से जुड़े भुगतान का विवाद लंबे समय से चार राज्यों के बीच लंबित था, लेकिन अब इसका सौहार्दपूर्ण समाधान निकाल लिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल सुरक्षा को मजबूत करने और सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और यह समझौता उसी सोच का परिणाम है।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सरदार सरोवर परियोजना से विशेष रूप से मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान को व्यापक लाभ मिला है। बांध के पूरा होने के बाद इन राज्यों में सिंचाई, पेयजल और बिजली की उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि राजस्थान को मिलने वाला पानी भले ही मात्रा में कम दिखाई देता हो, लेकिन जिन इलाकों तक नर्मदा का पानी पहुंचा है, वहां कृषि उत्पादन, भूमि का मूल्य और किसानों की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया है।

अमित शाह ने चारों राज्यों की सरकारों द्वारा इस महत्वपूर्ण अंतरराज्यीय परियोजना पर सहमति बनाने में निभाई गई सकारात्मक भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्यों के बीच संवाद और सहयोग के जरिए जटिल विवादों का समाधान संभव है और यह समझौता इसका उत्कृष्ट उदाहरण है।

उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय देश में जल वितरण और जल विवादों को चरणबद्ध तरीके से सुलझाने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने हाल ही में हरियाणा और राजस्थान के बीच जल विवाद के समाधान तथा किशाऊ बांध परियोजना जैसे मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास सहकारी संघवाद को और मजबूत करते हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि पानी किसी एक राज्य की नहीं, बल्कि पूरे देश की साझा संपत्ति है और इसका उपयोग जहां भी होगा, उसका लाभ अंततः देश के नागरिकों और विशेष रूप से किसानों को मिलेगा। उन्होंने राज्यों से अपील की कि किसी भी विवाद को राष्ट्रीय हित और विकास को ध्यान में रखते हुए आपसी सहमति से सुलझाया जाए। उनका कहना था कि यदि एक पड़ोसी राज्य समृद्ध होता है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव आसपास के राज्यों पर भी पड़ता है।

सरकार का मानना है कि इस समझौते से न केवल सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े लंबित मामलों का समाधान होगा, बल्कि चारों राज्यों के बीच सहयोग और समन्वय भी मजबूत होगा। साथ ही, जल संसाधनों के बेहतर उपयोग, सिंचाई व्यवस्था और किसानों के हितों को आगे बढ़ाने में भी यह समझौता महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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