मक्का पर हूती हमले की कोशिश से सऊदी में टेंशन, 4 देशों से मांगी एयर डिफेंस मदद
मुसलमानों के सबसे पवित्र शहर मक्का के पास हूती ड्रोन को मार गिराने के सऊदी अरब के दावे के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। अब खबर है कि सऊदी अरब ने अपनी मिसाइल और ड्रोन रोधी क्षमता को मजबूत करने के लिए फ्रांस, ब्रिटेन, पाकिस्तान और मिस्र से एयर डिफेंस सहायता मांगी है। दो क्षेत्रीय अधिकारियों के मुताबिक, सऊदी अरब के पास मिसाइल इंटरसेप्टर का स्टॉक दबाव में है और लगातार हो रहे ड्रोन-मिसाइल हमलों के बीच उसे सहयोगियों की मदद की जरूरत महसूस हो रही है।
मक्का से जुड़ा यह मामला 15 सितंबर की शाम सामने आया। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी के मुताबिक, सऊदी एयर डिफेंस ने मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन को उस समय इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया, जब वह पवित्र शहर के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल होने से पहले था। सऊदी पक्ष ने इसे मक्का को निशाना बनाने की कोशिश बताया और कहा कि दो पवित्र मस्जिदों तथा जायरीनों की सुरक्षा उसके लिए ‘रेड लाइन’ है।
हालांकि, इस आरोप को हूती विद्रोहियों ने खारिज किया है। हूती पक्ष का कहना है कि उसने मक्का को निशाना नहीं बनाया। इसलिए फिलहाल मक्का को निशाना बनाने के दावे को लेकर दोनों पक्षों के बयान अलग-अलग हैं।
मक्का की सुरक्षा को लेकर सऊदी अरब की चिंता ऐसे समय बढ़ी है, जब यमन के हूती विद्रोहियों के साथ संघर्ष फिर तेज हुआ है। क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, सऊदी अरब ने फ्रांस, ब्रिटेन, पाकिस्तान और मिस्र से इलाके में एयर डिफेंस सहायता उपलब्ध कराने की अपील की है, ताकि हूती और अन्य ईरान समर्थित समूहों की ओर से आने वाले ड्रोन और मिसाइलों से निपटा जा सके। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक इन देशों की ओर से सैन्य सहायता भेजे जाने की कोई स्पष्ट पुष्टि अभी नहीं हुई है।
सऊदी अरब की चिंता सिर्फ मक्का तक सीमित नहीं है। उसे अपने सैन्य ठिकानों, सरकारी प्रतिष्ठानों और तेल से जुड़े महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की भी सुरक्षा करनी है। हाल के हमलों ने सऊदी अरब के लिए ऊर्जा ढांचे और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा को भी चुनौती दी है। यमन के लाल सागर तट और बाब-अल-मंदब क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों का असर क्षेत्रीय शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। अमेरिका लंबे समय से सऊदी अरब का प्रमुख सुरक्षा सहयोगी और हथियार आपूर्तिकर्ता रहा है, लेकिन मौजूदा क्षेत्रीय संघर्ष के बीच उसकी अपनी मिसाइल इंटरसेप्टर क्षमता पर भी दबाव होने की बात अधिकारियों ने कही है। इसी वजह से सऊदी अरब ने दूसरे पश्चिमी और क्षेत्रीय सहयोगियों से एयर डिफेंस सहायता मांगी है।
वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मक्का के पास ड्रोन घटना की निंदा करते हुए सऊदी अरब के साथ एकजुटता जताई है। हालांकि, राजनीतिक समर्थन और प्रत्यक्ष सैन्य सहायता में अंतर है और अभी तक पाकिस्तान समेत संबंधित देशों की ओर से इस मामले में सैन्य तैनाती की स्पष्ट पुष्टि नहीं हुई है।
सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, मक्का की सुरक्षा को लेकर किसी भी संभावित खतरे को गंभीरता से लिया जा रहा है। दूसरी ओर, हूती पक्ष मक्का को निशाना बनाने के आरोप से इनकार कर रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सऊदी अरब को उसके सहयोगी देशों से किस स्तर की एयर डिफेंस सहायता मिलती है और यमन से जुड़े इस संघर्ष का असर पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा पर कितना बढ़ता है।