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‘बीमारू यूपी नहीं, राजनेताओं की मानसिकता थी’, विश्वकर्मा जयंती पर योगी का विपक्ष पर हमला

लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश के पारंपरिक कारीगर और हस्तशिल्पी उपेक्षा, शोषण और निराशा का सामना करने को मजबूर थे। कारीगरों के कल्याण और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने पर ध्यान देने के बजाय तत्कालीन सरकारें दूसरी गतिविधियों में व्यस्त रहती थीं।

सीएम योगी ने अपने संबोधन में कहा, “जिन्हें सैफई में महोत्सव कराकर मुंबई से लोगों को बुलाकर डांस करवाने से फुर्सत न हो और बर्मिंघम की बग्घी लाकर अपना जन्मदिन मनाने से फुर्सत न हो, वे कारीगरों के बारे में कब सोचते? वे स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के बारे में कब सोचते?” उन्होंने दावा किया कि जब उनकी सरकार ने कारीगरों के लिए योजनाएं शुरू कीं, तो विपक्ष के लोगों ने उनका मजाक उड़ाया।

मुख्यमंत्री गुरुवार को लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर आयोजित कारीगरों और हस्तशिल्पियों के सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने वर्ष 2017 से पहले की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य कहा जाता था। उनके मुताबिक, प्रदेश के पास बड़ी आबादी, उपजाऊ भूमि, पर्याप्त जल संसाधन और युवा शक्ति होने के बावजूद पिछली सरकारों की सोच के कारण विकास प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि बीमारू उत्तर प्रदेश नहीं, बल्कि प्रदेश को संचालित करने वाले राजनेताओं की मानसिकता थी, जो हस्तशिल्पियों और कारीगरों का सम्मान नहीं करती थी।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदर्शनी में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया और कारीगरों के उत्पादों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने मार्जिन मनी ऋण पोर्टल का शुभारंभ किया। इसके साथ ही पारंपरिक पेशों से जुड़े कारीगरों को टूलकिट और ऋण वितरित करने की प्रक्रिया की शुरुआत भी की गई। कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए कई संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान हुआ।

इन समझौतों में मीडिया एंड एंटरटेनमेंट स्किल काउंसिल, इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर स्किल काउंसिल ऑफ इंडिया, हैंडीक्राफ्ट एंड कार्पेट स्किल काउंसिल और टाटा पावर शामिल रहे। कार्यक्रम में एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी भी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना लागू की गई थी। इसके बाद वर्ष 2019 में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना की शुरुआत की गई। इन योजनाओं का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों को प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण, वित्तीय सहायता और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि कारीगर और हस्तशिल्पी केवल श्रमिक बनकर न रहें, बल्कि अपने काम को आगे बढ़ाकर उद्यमी बनें।

सीएम योगी ने बताया कि विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के शुरुआती चरण में 16 पारंपरिक ट्रेड को शामिल किया गया था। इनमें बढ़ई, दर्जी, कुम्हार, लोहार, नाई, राजमिस्त्री, सुनार, टोकरी बनाने वाले, बुनकर, हलवाई, मोची और धोबी जैसे पेशे शामिल थे। युवाओं की बदलती जरूरतों और रोजगार की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए अब मोबाइल रिपेयरिंग, ऑटोमोबाइल रिपेयर, इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिकल उपकरणों की मरम्मत, प्लंबिंग, कंप्यूटर रिपेयरिंग, सोलर इंस्टॉलेशन, डिजिटल फोटोग्राफी और ब्यूटी पार्लर जैसे आधुनिक ट्रेड भी योजना में शामिल किए गए हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, अब कुल 25 ट्रेड में प्रशिक्षण और सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने आगामी उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर में यूपी ट्रेड शो का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस आयोजन के माध्यम से प्रदेश को लगभग 12 हजार से 15 हजार करोड़ रुपये तक का कारोबार और ऑर्डर मिल सकते हैं। उनके मुताबिक, इससे होने वाला आर्थिक लाभ सीधे प्रदेश के कारीगरों, हस्तशिल्पियों और उद्यमियों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

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