आजम खान के घर पहुंचे स्वामी प्रसाद मौर्य, क्या कांग्रेस के साथ बन रहा नया सियासी समीकरण?
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी वक्त है, लेकिन प्रदेश की सियासत में चुनावी तैयारियां और राजनीतिक समीकरणों की कवायद तेज होती दिखाई दे रही है। इसी बीच रामपुर से सामने आई एक मुलाकात ने यूपी की सियासत में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी (RSSP) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामपुर पहुंचकर आजम खान के परिवार से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और आजम खान के बीच संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
जानकारी के मुताबिक, स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामपुर में आजम खान की पत्नी तंजीन फातिमा और उनके बेटे अदीब से मुलाकात की। दोनों के बीच करीब 45 मिनट तक बातचीत हुई। हालांकि, मुलाकात को लेकर स्वामी प्रसाद मौर्य ने इसे शिष्टाचार भेंट बताया और कहा कि रामपुर आने का मकसद परिवार का हालचाल जानना था। इसके बावजूद राजनीतिक हलकों में इस मुलाकात के कई मायने निकाले जा रहे हैं।
दरअसल, स्वामी प्रसाद मौर्य पिछले कुछ समय से विपक्षी दलों के साथ राजनीतिक नजदीकियों को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने अपनी पार्टी को इंडिया गठबंधन में शामिल करने की इच्छा जाहिर की थी। इसके अलावा उनकी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात भी हो चुकी है। हालांकि, कांग्रेस की ओर से स्वामी प्रसाद मौर्य की पार्टी को इंडिया गठबंधन में शामिल किए जाने को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
ऐसे में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य का रामपुर जाकर आजम खान के परिवार से मिलना राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी वजह से यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपने राजनीतिक विस्तार के लिए आजम खान के प्रभाव वाले मुस्लिम वोट बैंक तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, फिलहाल इसे लेकर कांग्रेस या आजम खान की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
आजम खान के परिवार से मुलाकात के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य ने उत्तर प्रदेश सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि आजम खान के खिलाफ जिस तरह की कार्रवाई की जा रही है, वह बदले की भावना से प्रेरित है और लोकतंत्र में ऐसी कार्रवाई का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। वहीं, जब उनसे राहुल गांधी के साथ हुई हालिया मुलाकात को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने इस पर सीधे जवाब देने से परहेज किया और रामपुर दौरे को पारिवारिक मुलाकात बताया।
रामपुर की इस मुलाकात को समाजवादी पार्टी और आजम खान के रिश्तों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। आजम खान लंबे समय तक समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुस्लिम चेहरों में रहे हैं और रामपुर उनकी मजबूत राजनीतिक जमीन मानी जाती रही है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में आजम खान और सपा नेतृत्व के बीच रिश्तों को लेकर समय-समय पर अलग-अलग तरह की राजनीतिक चर्चाएं सामने आती रही हैं।
अक्टूबर 2023 में जेल से बाहर आने के दौरान आजम खान का एक बयान भी काफी चर्चा में रहा था। मीडिया के सवाल पर उन्होंने मीर की मशहूर गजल का शेर पढ़ते हुए कहा था, “पत्ता-पत्ता बूटा-बूटा, हाल हमारा जाने है।” इसके आगे की पंक्ति है, “जाने न जाने गुल ही न जाने, बाग तो सारा जाने है।” उस समय आजम खान के इस बयान को उनके और समाजवादी पार्टी नेतृत्व के रिश्तों से जोड़कर भी देखा गया था।
अब एक बार फिर रामपुर में आजम खान के परिवार और स्वामी प्रसाद मौर्य की मुलाकात ने राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है। एक तरफ स्वामी प्रसाद मौर्य विपक्षी गठबंधन के साथ नजदीकी बढ़ाने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपने संगठन और सामाजिक समीकरण को मजबूत करने में जुटी है। ऐसे में आजम खान का राजनीतिक रुख आने वाले समय में विपक्षी राजनीति के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
हालांकि, फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि कांग्रेस और आजम खान के बीच किसी तरह की राजनीतिक बातचीत या गठजोड़ की औपचारिक पहल हुई है। स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी रामपुर की अपनी यात्रा को शिष्टाचार मुलाकात बताया है। लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में जिस तरह नए राजनीतिक समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं, उसमें रामपुर की यह मुलाकात आने वाले दिनों में सियासी चर्चा का बड़ा मुद्दा जरूर बन सकती है।