तीन साल बाद बिना तिथि विवाद के दिवाली, 8 नवंबर को पूरे दिन रहेगी अमावस्या
इस साल दीपावली को लेकर तीन साल बाद ऐसी स्थिति बन रही है, जब देशभर में पर्व की तिथि को लेकर किसी बड़े विवाद की स्थिति नहीं है। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति ऐसी है कि 8 नवंबर को सुबह से लेकर रात तक अमावस्या तिथि रहेगी। यही वजह है कि इस बार उत्तर से दक्षिण तक दीपावली एक ही दिन मनाने को लेकर पंचांगों में एकरूपता बनी हुई है।
बीएचयू के ज्योतिष विभाग से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में अमावस्या तिथि सूर्यास्त के आसपास शुरू होने के कारण दीपावली की तिथि को लेकर अलग-अलग मत सामने आते रहे थे। इस बार अमावस्या एक ही दिन पड़ रही है और प्रदोष काल भी उसी दिन रहेगा। ऐसे में तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति नहीं बन रही है।
पंचांगों में एकरूपता लाने के लिए पिछले तीन वर्षों में काशी विद्वत परिषद और बीएचयू के ज्योतिष विभाग की ओर से देशभर के 100 से अधिक पंचांगों का अध्ययन किया गया। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन के माध्यम से तिथि और पर्व निर्धारण को लेकर विशेषज्ञों के बीच समन्वय की कोशिश की गई। सत्र 2026-27 के पंचांगों में इस प्रक्रिया के बाद एक तिथि और एक पर्व की धारणा को बढ़ावा मिला है।
पंचांग एकरूपता अभियान के समन्वयक रहे प्रो. विनय कुमार पांडेय, जो बीएचयू के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष भी हैं, के अनुसार इस बार ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति ही ऐसी है कि दीपावली की तिथि को लेकर विवाद की गुंजाइश नहीं है। उनके मुताबिक, पहले अमावस्या कभी सूर्यास्त के आसपास शुरू होकर अगले दिन तक रहती थी, जिससे शास्त्रीय नियमों की अलग-अलग व्याख्या के कारण भ्रम पैदा होता था। इस बार अमावस्या और दीपावली की स्थिति एक ही दिन स्पष्ट रूप से बन रही है।
8 नवंबर को सुबह 10:50 बजे से अमावस्या तिथि शुरू होगी। इसी समय से दीपावली का मुहूर्त भी माना जा रहा है। इससे पहले हनुमान जयंती का पर्व मनाया जाएगा। सुबह 10:50 बजे से रात 12 बजे तक दीपावली मनाने के लिए करीब 13 घंटे 10 मिनट का समय उपलब्ध रहेगा।
दीपावली पर मां लक्ष्मी की पूजा के लिए प्रदोष काल को विशेष महत्व दिया गया है। इस दिन सूर्यास्त के बाद करीब 2 घंटे 24 मिनट तक प्रदोष काल रहेगा। इसी अवधि में लक्ष्मी पूजन और दीप प्रज्ज्वलन का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान विधि-विधान से मां लक्ष्मी की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
श्री काशी विश्वनाथ न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय के अनुसार, 8 नवंबर को सुबह 10:50 बजे से अमावस्या लगने के कारण इसी दिन दीपावली मनाई जाएगी। उनके मुताबिक, दीपावली की पूजा के लिए प्रदोष काल सबसे महत्वपूर्ण समय रहेगा और श्रद्धालु इसी अवधि में मां लक्ष्मी का पूजन कर दीप जलाएंगे।
इस अमावस्या पर पितरों से जुड़ी परंपराओं का भी उल्लेख किया गया है। धार्मिक विधान के अनुसार दीपक लेकर दक्षिण दिशा की ओर पितरों को दीप दिखाने और उनका स्मरण करने की परंपरा है। इसके साथ ही अमावस्या तिथि पर पितरों के श्राद्ध और तर्पण का भी विधान माना गया है।
पंचांग एकरूपता टीम से जुड़े डॉ. सुभाष पांडेय का कहना है कि शुद्ध पंचांग गणना में तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति नहीं होती, बशर्ते गणना और आकलन सटीक हो। इस बार ग्रहों की प्राकृतिक स्थिति ऐसी है कि दीपावली की तिथि को लेकर किसी तरह का भ्रम पैदा नहीं हो रहा है। ऐसे में इस वर्ष देशभर में 8 नवंबर को एक ही दिन दीपावली मनाए जाने की स्थिति बन रही है।