मुख्य सामग्री पर जाएं
ब्रेकिंग न्यूज़
‘पैसे मांगे तो जेल में सड़ना पड़ेगा’, शिक्षकों को नियुक्ति पत्र देते समय CM योगी की सख्त चेतावनी क्या दूसरे राज्यों में भी दिख रहा योगी मॉडल? बिहार के जमुई कांड से कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल योगी सरकार का जॉब कैलेंडर ऑन! 4 दिन में 5,297 युवाओं को मिली सरकारी नौकरी CM योगी देंगे 818 युवाओं को नियुक्ति पत्र, स्वास्थ्य से आयुष तक इन पदों पर मिलेगी नौकरी अमित शाह करेंगे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का उद्घाटन, 25 सितंबर से शुरू होगा बड़ा आयोजन ‘बंदूक की राजनीति अब नहीं चलेगी’, मेरठ में सीएम योगी का सपा-कांग्रेस पर बड़ा हमला मेरठ में नितिन नवीन का सपा-कांग्रेस पर हमला, बोले- यूपी को फिर बांटने की कोशिश हो रही ‘2027 में सपा को अपनी हार साफ दिख रही’, दानिश आजाद अंसारी का अखिलेश यादव पर तीखा हमला यूपी में 2027 से पहले पोस्टर वार तेज, अखिलेश यादव के खिलाफ लगे ‘आजम-अतीक-मुख्तार’ वाले पोस्टर 2027 से पहले बड़ा सवाल: उत्तर प्रदेश के लिए योगी मॉडल कितना जरूरी? कानून-व्यवस्था, रोजगार, महिला सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिपोर्ट

भारत का पहला डायबिटीज बायोबैंक चेन्नई में स्थापित, युवाओं को शुगर से बचाने में करेगा मदद

भारत का पहला डायबिटीज बायोबैंक चेन्नई में स्थापित, युवाओं को शुगर से बचाने में करेगा मदद

मधुमेह या डायबिटीज, भारत में एक तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या बन गई है। खराब जीवनशैली और अस्वास्थ्यकर आहार की वजह से अब यह बीमारी सिर्फ वृद्धों तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवा भी बड़ी संख्या में इसके शिकार हो रहे हैं। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए, भारत में पहला डायबिटीज बायोबैंक चेन्नई में स्थापित किया गया है। यह बायोबैंक इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन (MDRF) के संयुक्त प्रयास से बनाया गया है।

डायबिटीज बायोबैंक एक अत्याधुनिक रिपॉजिटरी है, जिसमें डायबिटीज से पीड़ित लोगों के सैंपल और डेटा संग्रहित किए जाएंगे। इसका मुख्य उद्देश्य मधुमेह के कारणों को समझना, नई शोध करना, और इस बीमारी के प्रभावी उपचार के लिए समाधान खोजना है। MDRF के अध्यक्ष डॉ. वी. मोहन के अनुसार, यह बायोबैंक मधुमेह की शुरुआती पहचान और उपचार के लिए नए बायोमार्कर की खोज में मददगार होगा।

यह बायोबैंक डायबिटीज के मामलों में वृद्धि पर नियंत्रण पाने में महत्वपूर्ण योगदान देगा। यहां किए गए शोध से प्राप्त डेटा भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर डायबिटीज के इलाज में मदद करेगा। सैंपल स्टोरेज और डेटा-शेयरिंग की आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर यह बायोबैंक सस्ते और प्रभावी उपचार की दिशा में अहम भूमिका निभाएगा।

स्टडी क्या कहती है? डायबिटीज बायोबैंक की पहली स्टडी ICMR-INDIAB के तहत 1.2 लाख से ज्यादा लोगों पर की गई। इस शोध में यह पाया गया कि भारत में 10 करोड़ से ज्यादा लोग डायबिटीज या प्री-डायबिटीज से प्रभावित हैं। एक अन्य अध्ययन में युवाओं में डायबिटीज के बढ़ते मामलों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें 5,500 से ज्यादा युवा शामिल थे।

भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कदम डायबिटीज बायोबैंक भारत में मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए एक बड़ा मंच प्रदान करेगा। यह न केवल भारत के युवाओं को इस लाइलाज बीमारी से बचाने में मदद करेगा, बल्कि देश को इस दिशा में वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करने का अवसर भी देगा।

Share
अगला लेख → नाश्ते में मखाना और दूध का सेवन करके हड्डियों के दर्द और कमज…

टिप्पणी करें

Your email address will not be published. Required fields are marked *