मुख्य सामग्री पर जाएं
ब्रेकिंग न्यूज़
गोरखपुर-वाराणसी समेत 4 शहरों में भारत टैक्सी की शुरुआत, योगी सरकार ने शुरू किया नया मॉडल योगी सरकार ने बिजली विभाग को दिए सख्त निर्देश, त्योहारों में निर्बाध आपूर्ति का बनाया प्लान राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: तीन और आरोपियों की जमानत खारिज, टिन्नू यादव की याचिका पर आज सुनवाई राज्यसभा चुनाव से पहले BJP की नई रणनीति, यूपी में बदलेंगे ज्यादातर चेहरे, जातीय समीकरण रहेगा कायम ‘पैसे मांगे तो जेल में सड़ना पड़ेगा’, शिक्षकों को नियुक्ति पत्र देते समय CM योगी की सख्त चेतावनी क्या दूसरे राज्यों में भी दिख रहा योगी मॉडल? बिहार के जमुई कांड से कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल योगी सरकार का जॉब कैलेंडर ऑन! 4 दिन में 5,297 युवाओं को मिली सरकारी नौकरी CM योगी देंगे 818 युवाओं को नियुक्ति पत्र, स्वास्थ्य से आयुष तक इन पदों पर मिलेगी नौकरी अमित शाह करेंगे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का उद्घाटन, 25 सितंबर से शुरू होगा बड़ा आयोजन ‘बंदूक की राजनीति अब नहीं चलेगी’, मेरठ में सीएम योगी का सपा-कांग्रेस पर बड़ा हमला

आचार्य सत्येंद्र दास को सरयू में ‘जल समाधि’, आखिर संतों का दाह संस्कार क्यों नहीं किया जाता ?

आचार्य सत्येंद्र दास को सरयू में ‘जल समाधि’, आखिर संतों का दाह संस्कार क्यों नहीं किया जाता ?

अयोध्या में स्थित राम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य पुजारी महंत सत्येंद्र दास का बुधवार को निधन हो गया। गुरुवार की शाम उन्हें सरयू नदी में जल समाधि दी गई। तुलसीदास घाट पर उनके पार्थिव शरीर को विधि-विधान से जल समाधि दी गई। इससे पहले, उनके पार्थिव शरीर को एक रथ पर रखकर नगर भ्रमण कराया गया, जिसके बाद संत परंपरा के अनुसार उन्हें जल समाधि दी गई।

अब सवाल उठता है कि साधु-संतों को जल समाधि क्यों दी जाती है और उनका दाह संस्कार क्यों नहीं किया जाता?

सनातन धर्म में अंतिम संस्कार की कई विधियां प्रचलित हैं, जिनमें साधु-संतों के लिए जल समाधि एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जाती है। इसमें संत के पार्थिव शरीर को बिना अग्नि संस्कार के सीधे नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है। जल समाधि के दौरान शरीर के साथ भारी पत्थर बांधे जाते हैं ताकि वह नदी की गहराई में समा जाए।

इसके अलावा, संतों के लिए भू-समाधि की परंपरा भी प्रचलित है। इसमें पार्थिव शरीर को पद्मासन या सिद्धासन की मुद्रा में बिठाकर भूमि में समाधिस्थ कर दिया जाता है। यह मान्यता है कि संतों का शरीर पवित्र होता है और वे अपने जीवनकाल में सांसारिक बंधनों से मुक्त हो चुके होते हैं, इसलिए उन्हें अग्नि संस्कार देने की बजाय जल या भू-समाधि दी जाती है

Share
अगला लेख → असम में बरामद 182 किलो का बम निष्क्रिय, इतिहास में द्वितीय व…

टिप्पणी करें

Your email address will not be published. Required fields are marked *