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बीएचयू में पीएचडी दाखिले पर यूजीसी ने लगाई रोक, मामले की जांच के आदेश

बीएचयू में पीएचडी दाखिले पर यूजीसी ने लगाई रोक, मामले की जांच के आदेश

यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) में पीएचडी पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया में पाई गई अनियमितताओं को लेकर एडमिशन पर अस्थायी रोक लगा दी है। यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि वह बीएचयू की पीएचडी एडमिशन प्रक्रिया 2025 की जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन करेगा, जो इन विसंगतियों की गहनता से समीक्षा करेगी।

यूजीसी द्वारा बीएचयू को भेजे गए निर्देश में कहा गया है कि जब तक यह समिति अपनी रिपोर्ट पेश नहीं कर देती और मामले में कोई अंतिम निर्णय नहीं ले लिया जाता, तब तक पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ी सभी गतिविधियों पर रोक रहेगी। आयोग ने यह भी दोहराया है कि सभी विश्वविद्यालयों को यूजीसी रेगुलेशन 2022 के तहत तय न्यूनतम मानकों का पालन करते हुए ही पीएचडी में प्रवेश और डिग्री प्रदान करनी चाहिए।

यूजीसी ने नोटिस जारी कर जताई सख्ती

यूजीसी ने अपने नोटिस में कहा, “यह आवश्यक है कि सभी विश्वविद्यालय यूजीसी के 2022 के नियमों के तहत पीएचडी में नामांकन और डिग्री प्रदान करें। बीएचयू में हो रही अनियमितताओं की जांच और नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए एक समिति का गठन किया गया है।”

एक माह से प्रदर्शन कर रहे छात्र

यूजीसी के निर्देश मिलते ही बीएचयू प्रशासन ने प्रवेश से संबंधित सभी गतिविधियाँ तत्काल प्रभाव से रोक दी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यूजीसी ने कार्यवाहक कुलपति प्रो. संजय कुमार और रजिस्ट्रार प्रो. अरुण कुमार सिंह को पुनः चर्चा के लिए दिल्ली तलब किया है। गौरतलब है कि पीएचडी एडमिशन प्रक्रिया में गड़बड़ी को लेकर छात्र पिछले एक महीने से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।

हालांकि, अब तक विश्वविद्यालय में 944 विद्यार्थियों को पीएचडी में प्रवेश मिल चुका है, जबकि कुल 1466 सीटें निर्धारित की गई थीं। यूजीसी की इस कार्रवाई के बाद शेष प्रवेशों पर असमंजस की स्थिति बन गई है।

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