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यूपी की 84 साल पुरानी हवाई पट्टी में फिर जान, इमरजेंसी लैंडिंग के लिए तैयार

यूपी की 84 साल पुरानी हवाई पट्टी में फिर जान, इमरजेंसी लैंडिंग के लिए तैयार

गाजीपुर जनपद के अंधऊ गांव में स्थित एक ऐतिहासिक हवाई पट्टी का निर्माण द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश शासन द्वारा कराया गया था। करीब 63 एकड़ क्षेत्रफल में फैली इस हवाई पट्टी का निर्माण उस समय की सैन्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया गया था। युद्ध के दौरान सैनिकों को राशन और जरूरी सामग्री पहुंचाने तथा इमरजेंसी स्थिति में विमानों की लैंडिंग के उद्देश्य से इसका इस्तेमाल किया गया। हालांकि अब तक यहां किसी फाइटर प्लेन की लैंडिंग नहीं हुई है, लेकिन छोटे विमान और हेलीकॉप्टर यहां नियमित रूप से उतरते हैं।

जानकारों के अनुसार, यह हवाई पट्टी उस समय बनाई गई थी जब जापान भारत के कई हिस्सों पर हमला कर रहा था। बर्मा, जो भारत के पड़ोसी देश है, वहां से जापानी हमले की आशंका को देखते हुए ब्रिटिश सरकार ने रणनीतिक दृष्टिकोण से इस क्षेत्र में दो हवाई पट्टियों का निर्माण कराया—एक अंधऊ गांव में और दूसरी मोहम्मदाबाद तहसील के गौसपुर गांव में। नेपाल और गोरखपुर एयरबेस की निकटता भी इस स्थान की महत्ता को बढ़ाती थी।

लेखक और इतिहासकार उबैदुर रहमान बताते हैं कि यह हवाई पट्टी 1941-42 के आसपास बनाई गई थी। उन्होंने यह भी बताया कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इसी हवाई पट्टी का इस्तेमाल स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा ब्रिटिश सरकार के अनाज और सामग्री को लूटने के लिए भी किया गया था। आजादी के बाद यह हवाई पट्टी छोटे विमानों और हेलीकॉप्टरों की लैंडिंग के लिए उपयोग में लाई जाती रही है।

राजनीतिक दृष्टि से भी यह हवाई पट्टी महत्वपूर्ण रही है। मऊ, बलिया और बिहार की राजनीति से जुड़े कई नेता इसी हवाई पट्टी से हेलीकॉप्टर या छोटे विमानों द्वारा पहुंचते रहे हैं। चुनावी समय में बड़े राजनीतिक नेताओं की आवाजाही भी यहीं से होती है।

पूर्व सांसद मनोज सिन्हा ने इस हवाई पट्टी को और अधिक विकसित करने की योजना बनाई थी, लेकिन चुनाव में हार के बाद उस पर काम नहीं हो सका। बाद में राज्यसभा सांसद डॉ. संगीता बलवंत ने भी इसे लेकर संसद में आवाज उठाई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है।

द्वितीय विश्व युद्ध की इस विरासत को आज एक आधुनिक हवाई अड्डे में बदलने की आवश्यकता महसूस की जा रही है, ताकि इसका समुचित उपयोग हो सके और यह पूर्वांचल की हवाई सेवाओं के विस्तार में योगदान दे सके।

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