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जब congress कांग्रेस के टिकट पर जगदीप धनखड़ ने जीता था विधानसभा चुनाव

जब congress कांग्रेस के टिकट पर जगदीप धनखड़ ने जीता था विधानसभा चुनाव

आज हम बात करेंगे भारत के 14वें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के सियासी सफर की, जिन्होंने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। आइए, जानते हैं उनके शानदार करियर की कहानी और इस इस्तीफे के पीछे की वजह।

जगदीप धनखड़ ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1989 में की, जब जनता दल के टिकट पर उन्होंने झुंझुनू लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा। 15 उम्मीदवारों के बीच धनखड़ ने 4 लाख 21 हजार 686 वोट हासिल किए, यानी 58.73% वोट शेयर! उन्होंने कांग्रेस के मोहम्मद अयूब खान को 1 लाख 61 हजार 981 वोटों से हराकर शानदार जीत दर्ज की। इसके बाद, 1990-91 में वो चंद्रशेखर सरकार में संसदीय कार्य राज्य मंत्री बने।

1991 में धनखड़ कांग्रेस में शामिल हुए और 1993 में राजस्थान के किशनगढ़ विधानसभा सीट से विधायक चुने गए। 44.81% वोट शेयर के साथ उन्होंने 41,444 वोट हासिल किए और बीजेपी के जगजीत सिंह को 1958 वोटों के अंतर से हराया। 11 उम्मीदवारों के बीच ये जीत उनकी सियासी ताकत को दर्शाती है।

2003 में धनखड़ ने बीजेपी का दामन थामा और पार्टी के कानूनी विभाग के प्रमुख बने। 2019 से 2022 तक वो पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे, जहां उनका तृणमूल कांग्रेस सरकार के साथ तीखा टकराव देखने को मिला। उनकी मुखर शैली और सैद्धांतिक रुख ने उन्हें चर्चा में रखा।

2022 में बीजेपी और एनडीए ने उन्हें उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया। 6 अगस्त 2022 को हुए चुनाव में धनखड़ ने 528 वोटों के साथ विपक्ष की मार्गरेट अल्वा को हराकर 74.37% वोट शेयर के साथ ऐतिहासिक जीत हासिल की। 11 अगस्त 2022 को वो देश के 14वें उपराष्ट्रपति बने।

लेकिन 21 जुलाई 2025 को, धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया। यह भारतीय इतिहास में पहली बार है जब कोई उपराष्ट्रपति अपने कार्यकाल के बीच में इस्तीफा दे रहा है। विपक्ष का कहना है कि इसके पीछे “कुछ और” वजह हो सकती है। उनके इस्तीफे ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है।

विपक्षी नेताओं का कहना है कि इस्तीफे के पीछे संसद के मानसून सत्र में हुई चर्चा या जज के महाभियोग से जुड़े विवाद हो सकते हैं। समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने कहा, “बीजेपी को उनका हालचाल लेना चाहिए, फेयरवेल भी नहीं हुआ।

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