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राजस्थान में कोचिंग बिल को लेकर कांग्रेस में फूट, डोटासरा ने अपने ही विधायक को दी कड़ी चेतावनी l

राजस्थान में कोचिंग बिल को लेकर कांग्रेस में फूट, डोटासरा ने अपने ही विधायक को दी कड़ी चेतावनी l

राजस्थान विधानसभा में हाल ही में पारित हुए “कोचिंग सेंटर नियंत्रण एवं विनियमन विधेयक 2025” को लेकर कांग्रेस पार्टी में मतभेद उभरकर सामने आए हैं। यह बिल छात्रों के हित में कोचिंग संस्थानों की मनमानी और बढ़ते दबाव को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लाया गया है। लेकिन इस बिल के कई प्रावधानों को लेकर पार्टी के अंदर भी विरोध-प्रतिक्रिया जारी है।

राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष और विधायको के नेता गोपाल सिंगh डोटासरा ने बिल को लेकर पार्टी के अंदर चल रही असहमति पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अपने ही एक विधायक को सार्वजनिक तौर पर कड़ी चेतावनी दी है कि पार्टी की नीति के खिलाफ बयानबाजी या कदम उठाने पर कठोर कार्रवाई होगी। डोटासरा का मानना है कि कोचिंग बिल प्रदेश के युवाओं और अभिभावकों के हित में है और इसे आगे बढ़ाने में कांग्रेस पूरी ताकत लगाएगी।

कोचिंग बिल में कोचिंग संस्थानों को 100 से अधिक छात्रों वाले ही पंजीकरण कराने का प्रावधान, फीस वसूली के नियम, जुर्माने और निगरानी प्राधिकरण के गठन जैसे कड़े उपाय शामिल हैं। बिल को लेकर विधानसभा में भी कांग्रेस के कुछ विधायकों ने सवाल उठाए, जिससे सदन में हंगामा भी हुआ। विपक्ष में कुछ नेता इसे कोचिंग माफिया की सम्पूर्ण समर्थन वाली सरकारी योजना बताते हुए आलोचना कर रहे हैं।

डोटासरा ने साफ किया कि पार्टी के भीतर जो भी कोचिंग बिल को कमजोर करने या उसका विरोध करेगा, उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। उन्होंने विधायकों को इस मामले में एकजुट रहने और सरकार के सकारात्मक कदमों को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है। Congress के वरिष्ठ नेता और प्रवर समिति के सदस्य राजेन्द्र पारीक ने बिल का समर्थन करते हुए इसे समय की जरूरत बताया, जबकि कुछ विधायक अभी भी संशोधनों की मांग कर रहे हैं।

राजस्थान सरकार का कहना है कि यह विधेयक खासकर कोटा जैसे शिक्षा हब में छात्रों पर हो रहे अत्यधिक दबाव, मनोवैज्ञानिक तनाव और आत्महत्या की घटनाओं को रोकने में मदद करेगा। इस बिल के तहत कोचिंग सेंटरों की मनमानी बंद होगी, छात्रों को उचित फीस वापसी मिलेगी, और मानसिक स्वास्थ्य के लिए कोचिंग सेंटर में तनाव प्रबंधन सत्र अनिवार्य होंगे।

समीक्षक मानते हैं कि इस बिल को सही तरीके से लागू करना राज्य में शिक्षा क्षेत्र की गुणवत्ता सुधारने और छात्रों के मनोबल को बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम होगा। हालांकि, कांग्रेस में जारी मतभेद इस प्रक्रिया को बाधित कर सकते हैं।

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