मुख्य सामग्री पर जाएं
ब्रेकिंग न्यूज़
तरुण तेजपाल को बड़ा झटका! यौन उत्पीड़न केस में हाईकोर्ट ने ठहराया दोषी भगवंत सरकार कैबिनेट ने ‘पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) विधेयक-2026’ सहित कई जनहित के कार्यों को दी मंजूरी ‘क्या हमारी कीमत कीड़े-मकौड़ों से भी कम है?’ झारखंड के आंदोलनकारी छात्रों का फूटा गुस्सा किसी का कान फटा, किसी का कंधा खिसका’—एअर इंडिया फ्लाइट के यात्रियों ने सुनाई दहला देने वाली आपबीती हवा में हड़कंप! टर्बुलेंस में फंसी एअर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट, कई यात्री घायल पटना में बनेगा PM मोदी का मंदिर, बिहार किन्नर कल्याण बोर्ड की बैठक में बड़ा फैसला CM योगी का बड़ा लक्ष्य, इस बार 5 करोड़ घरों पर फहराएगा तिरंगा भगवा वेश में प्रदर्शन पड़ा भारी! राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद के खिलाफ केस दर्ज उमर खालिद की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को हाई कोर्ट का नोटिस SCO समिट के लिए पीएम मोदी को न्योता भेजने की तैयारी में पाकिस्तान, क्या इस्लामाबाद जाएंगे प्रधानमंत्री?

Homebound Review: 2025 की सबसे कमाल फिल्म, ऑस्कर के लिए काबिल! ईशान खट्टर और विशाल जेठवा ने दिलाई इरफान और केके मेनन की याद l

Homebound Review: 2025 की सबसे कमाल फिल्म, ऑस्कर के लिए काबिल! ईशान खट्टर और विशाल जेठवा ने दिलाई इरफान और केके मेनन की याद l

निर्देशक नीरज घायवान की फिल्म ‘होमबाउंड’ 2025 की सबसे संजीदा और प्रभावशाली फिल्मों में से एक मानी जा रही है। हाल ही में नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई इस फिल्म ने दुनियाभर के फिल्म फेस्टिवल्स में खूब तारीफें बटोरीं। इसे लेकर आलोचक भी इसे ऑस्कर जैसी प्रतिष्ठित फिल्मी प्रतियोगिताओं के लिए उपयुक्त मान रहे हैं।

‘होमबाउंड’ की कहानी दलित और मुस्लिम पृष्ठभूमि से जुड़े दो दोस्तों- मोहम्‍मद शोएब (ईशान खट्टर) और चंदन कुमार (विशाल जेठवा) के संघर्षों और दोस्ती पर आधारित है। फिल्म की पटकथा बशारत पीर की न्यूयॉर्क टाइम्स की लेखनी पर आधारित है, जिसमें लॉकडाउन के दौरान भारतीय प्रवासी मजदूरों की व्यथा को संवेदनशीलता के साथ दर्शाया गया है।

ईशान और विशाल की अभिनय कला फिल्म को जीवंत बनाती है। दोनों ने अपने किरदार को इस कदर प्रभावशाली ढंग से निभाया है कि कई बार दर्शक इरफान खान और केके मेनन जैसे महान अभिनेताओं की याद दिलाते हैं। जाह्नवी कपूर भी प्रमुख भूमिका में हैं, हालांकि उनकी भूमिका सीमित रही, लेकिन उन्होंने अच्छी प्रस्तुति दी है।

नीरज घायवन की निर्देशन शैली फिल्म को एक गहन, संवेदनशील और कई बार क्रूर यथार्थ से रूबरू कराती है। इस फिल्म में जाति, धर्म, वर्ग संघर्ष के साथ ही दोस्ती, उम्मीद और मानवीय रिश्तों की गहराई को भी बड़ी सूक्ष्मता से दिखाया गया है।

फिल्म को कान्स फिल्म फेस्टिवल में नौं मिनट की स्टैंडिंग ओवेशन मिली थी, वहीं टोरंटो समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इसे सराहा गया। आलोचकों ने इसे एक बहुप्रतीक्षित और एक नई सामाजिक चेतना जगाने वाली फिल्म बताया है।

कुल मिलाकर ‘होमबाउंड’ एक भावनात्मक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण फिल्म है, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देती है। इसने भारतीय सिनेमा में जाति, धर्म और अस्मिता के मामलों को एक नए दृष्टिकोण से पेश किया है।

Share This
अगला लेख → फिलीपींस में भ्रष्टाचार को लेकर गुस्से का विस्फोट, 1.30 लाख …

टिप्पणी करें

Your email address will not be published. Required fields are marked *

बाज़ार
सेंसेक्स 78,499 -456 (-0.58%)
निफ्टी 24,571 -65 (-0.26%)
मौसम
30°C
Light rain shower
💧 69% 💨 9 km/h
Dehradun