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भारत की ध्वनि मिसाइल पर ग्रीस ने बताया गेमचेंजर, तुर्की-पाक में घबराहट

भारत की ध्वनि मिसाइल पर ग्रीस ने बताया गेमचेंजर, तुर्की-पाक में घबराहट

भारत की नई हाइपरसोनिक मिसाइल ‘ध्वनि’ इन दिनों दुनियाभर की चर्चा का केंद्र बनी हुई है। इस मिसाइल को लेकर ग्रीस की एक प्रमुख डिफेंस वेबसाइट ने कहा है कि यह भविष्य में रक्षा के पूरे खेल को बदल सकती है। यही नहीं, ग्रीस ने यह भी सुझाव दिया है कि तुर्की की बढ़ती ताकत को देखते हुए उसे भारत से ब्रह्मोस मिसाइलें खरीद लेनी चाहिए।

ध्वनि मिसाइल भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO द्वारा बनाई जा रही है। इसकी पहली टेस्ट उड़ान 2025 के आखिर तक हो सकती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है इसकी रफ्तार। ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें जहां मैक 3 (करीब 3700 किलोमीटर प्रति घंटे) की स्पीड से चलती हैं, वहीं ‘ध्वनि’ की रफ्तार मैक 5 से 6 तक जा सकती है। यानी करीब 7400 किलोमीटर प्रति घंटे तक।

इतनी तेज स्पीड होने की वजह से इसे रोकना बहुत मुश्किल हो जाएगा। अमेरिका की THAAD सिस्टम हो या इजराइल की Iron Dome जैसी आधुनिक डिफेंस टेक्नोलॉजी — ये सभी भी ऐसी हाइपरसोनिक मिसाइलों को पकड़ पाने में सक्षम नहीं मानी जातीं।

ध्वनि को ‘Hypersonic Technology Demonstrator Vehicle’ प्रोग्राम के तहत विकसित किया जा रहा है। इसमें दो स्टेज होंगे — पहला, सॉलिड फ्यूल बूस्टर जो इसे ऊंचाई तक ले जाएगा, और दूसरा, हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल जो अपने टारगेट पर सटीक हमला करेगा।

ग्रीस के मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस मिसाइल ने वहां के रक्षा एक्सपर्ट्स को खासा प्रभावित किया है। उनका मानना है कि भारत की इस तकनीक से न सिर्फ उसका सैन्य दबदबा बढ़ेगा, बल्कि यह सहयोगी देशों के लिए भी गेमचेंजर साबित हो सकती है। यही वजह है कि ग्रीस ने सुझाव दिया है कि भारत से मिलकर उसे ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें खरीदनी चाहिए, ताकि तुर्की की समुद्री ताकत को जवाब दिया जा सके।

भारत और ग्रीस के बीच पिछले कुछ सालों में रक्षा सहयोग भी बढ़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर ग्रीस और भारत मिलकर काम करें, तो तकनीकी साझेदारी से दोनों देशों को फायदा होगा। इसके साथ-साथ भारत द्वारा प्रस्तावित व्यापार कॉरिडोर के जरिए ग्रीस को यूरोप का ‘गेटवे’ बनाने की संभावनाएं भी खुलती हैं।

कुल मिलाकर, भारत की यह नई हाइपरसोनिक मिसाइल ‘ध्वनि’ सिर्फ एक हथियार नहीं, बल्कि एक रणनीतिक कदम है। यह भविष्य में भारत को रक्षा तकनीक की दुनिया में और मजबूत स्थिति में ला सकती है — और उसकी तकनीक की गूंज अब सिर्फ एशिया में नहीं, यूरोप तक सुनाई देने लगी है।

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