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अल फलाह यूनिवर्सिटी पर सरकारी शिकंजा कसा, जमीन अधिग्रहण में गड़बड़ी की जांच तेज

अल फलाह यूनिवर्सिटी पर सरकारी शिकंजा कसा, जमीन अधिग्रहण में गड़बड़ी की जांच तेज

दिल्ली में लाल किले के पास हुए आतंकी हमले के बाद फरीदाबाद के धौज गांव में स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी पर सरकार और जांच एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है। यूनिवर्सिटी पर आतंकियों से कनेक्शन होने का शक जताया जा रहा है। इसी कड़ी में जिला नगर योजनाकार इन्फोर्समेंट की टीम ने यूनिवर्सिटी की जमीन की पैमाइश शुरू कर दी। करीब एक घंटे की कार्रवाई में टीम ने जमीन का मुआयना किया और प्रबंधन से संबंधित दस्तावेज भी मांगे। बताया जा रहा है कि हरियाणा सरकार ने पैमाइश करने का आदेश जारी किया है और पूरी रिपोर्ट जल्द सरकार को भेजी जाएगी। टीम यह पता लगा रही है कि 70 एकड़ में फैली यूनिवर्सिटी की जमीन के अधिग्रहण में कहीं कोई गड़बड़ी तो नहीं हुई।

अल फलाह यूनिवर्सिटी की शुरुआत 1997 में एक इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में हुई थी। बाद में 2013 में अल-फलाह इंजीनियरिंग कॉलेज को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन की नैक टीम ने ‘ए’ कैटेगरी की मान्यता दी। इसके साथ ही अल-फलाह मेडिकल कॉलेज भी इसी यूनिवर्सिटी से संबद्ध है। हरियाणा सरकार ने 2 मई 2014 को हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटी बिल में संशोधन करके इसे निजी विश्वविद्यालय का दर्जा दिया था। उस समय राज्य में कांग्रेस की सरकार थी और भूपेंद्र सिंह हुड्डा मुख्यमंत्री थे। उसी संशोधित बिल के जरिए प्रदेश में 17 निजी विश्वविद्यालयों को मंजूरी मिली थी।

जांच एजेंसियां अब यूनिवर्सिटी के स्टाफ और छात्रों की भी गहन जांच कर रही हैं। यूनिवर्सिटी परिसर से मिली लिस्ट में जम्मू-कश्मीर के लोगों की संख्या अधिक पाई गई है, जिसमें डॉक्टर, प्रोफेसर, छात्र और अन्य कर्मचारी शामिल हैं। यह लिस्ट जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ भी साझा की गई है। जांच एजेंसी मौजूदा स्टाफ के साथ-साथ पुराने कर्मचारियों की पृष्ठभूमि की भी जांच कर रही है। दिल्ली बम ब्लास्ट मामले में यूनिवर्सिटी से जुड़े कई डॉक्टरों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है।

इसी बीच नेशनल मेडिकल कमीशन ने कहा है कि वह यूनिवर्सिटी के खिलाफ कार्रवाई पर विचार कर रहा है लेकिन किसी भी कदम से पहले ठोस सबूतों का इंतजार करेगा। वहीं खबर है कि हरियाणा सरकार भी यूनिवर्सिटी की मान्यता से जुड़े मामलों पर जल्द ही एक महत्वपूर्ण बैठक करने वाली है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आने वाले दिनों में और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

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