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राम मंदिर में ध्वजारोहण का शुभ आयोजन: नारदपुराण में बताए गए गूढ़ महत्व पर एक नजर

राम मंदिर में ध्वजारोहण का शुभ आयोजन: नारदपुराण में बताए गए गूढ़ महत्व पर एक नजर

अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में आज एक विशेष और शुभ अवसर पर अभिजीत मुहूर्त में ध्वजारोहण किया जाएगा। यह सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि हिंदू धर्म और प्राचीन ग्रंथों में वर्णित बेहद महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है। पुराणों के अनुसार, मंदिर में ध्वज फहराना न सिर्फ शुभ माना जाता है, बल्कि इसे अत्यंत पुण्यदायी कर्म बताया गया है। आज जिस ध्वज को अयोध्या राम मंदिर में स्थापित किया जाएगा, वह 22 फुट लंबा, 11 फुट चौड़ा और 2 से 3 किलोग्राम वजनी है। इस ध्वज पर सूर्य देव का प्रतीक और कोविदार का चिन्ह अंकित है।

पुराणों में ध्वजारोपण की विशेष महिमा बताई गई है। नारदपुराण में लिखा है कि जो भी व्यक्ति भगवान विष्णु के मंदिर में ध्वज स्थापित करता है, वह ब्रह्मा और अन्य देवताओं द्वारा पूजित होता है। इसमें यह भी कहा गया है कि मंदिर में ध्वजा लगाना ऐसा पुण्य देता है, जैसे एक हजार भार सुवर्ण दान किया हो। पुराणों के अनुसार, ध्वजारोहण से सभी पाप नष्ट होते हैं और व्यक्ति की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। ध्वज का दंड यदि बांस या साखू का बनाया गया हो, तो इसे और भी अधिक शुभ माना जाता है। माना जाता है कि जैसे ही मंदिर में लगाया गया ध्वज हवा में लहराना शुरू करता है, उसी क्षण ध्वज स्थापित करने वाले के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं।

ध्वजारोहण की प्रक्रिया भी शास्त्रीय विधि से होती है। प्रातःकाल स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इसके बाद चार ब्राह्मणों के साथ स्वस्तिवाचन और नांदीमुख श्राद्ध किया जाता है। ध्वज और उसके स्तंभ का गायत्री मंत्र से अभिषेक होता है। इसके बाद ध्वज पर सूर्य, चंद्र और गरुड़ की पूजा की जाती है, जबकि दंड में धाता और विधाता का पूजन किया जाता है। ध्वज स्थापना में हल्दी, अक्षत, गंध और श्वेत पुष्पों का विशेष महत्व माना गया है।

आज ध्वजारोपण अभिजीत मुहूर्त में किया जा रहा है, जो ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम और भगवान कृष्ण दोनों का जन्म इसी मुहूर्त में हुआ था। यह मुहूर्त दोपहर के लगभग 12 बजे के आसपास शुरू होता है और करीब 48 मिनट तक रहता है। कहा जाता है कि इस समय किए गए कार्य पर विष्णु की विशेष कृपा होती है।

अयोध्या के राम मंदिर में आज होने वाला यह ध्वजारोहण न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पूरे देश के भक्तों के लिए आस्था, परंपरा और शुभता का अनूठा संगम भी है।

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