मुख्य सामग्री पर जाएं
ब्रेकिंग न्यूज़
तरुण तेजपाल को बड़ा झटका! यौन उत्पीड़न केस में हाईकोर्ट ने ठहराया दोषी भगवंत सरकार कैबिनेट ने ‘पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) विधेयक-2026’ सहित कई जनहित के कार्यों को दी मंजूरी ‘क्या हमारी कीमत कीड़े-मकौड़ों से भी कम है?’ झारखंड के आंदोलनकारी छात्रों का फूटा गुस्सा किसी का कान फटा, किसी का कंधा खिसका’—एअर इंडिया फ्लाइट के यात्रियों ने सुनाई दहला देने वाली आपबीती हवा में हड़कंप! टर्बुलेंस में फंसी एअर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट, कई यात्री घायल पटना में बनेगा PM मोदी का मंदिर, बिहार किन्नर कल्याण बोर्ड की बैठक में बड़ा फैसला CM योगी का बड़ा लक्ष्य, इस बार 5 करोड़ घरों पर फहराएगा तिरंगा भगवा वेश में प्रदर्शन पड़ा भारी! राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद के खिलाफ केस दर्ज उमर खालिद की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को हाई कोर्ट का नोटिस SCO समिट के लिए पीएम मोदी को न्योता भेजने की तैयारी में पाकिस्तान, क्या इस्लामाबाद जाएंगे प्रधानमंत्री?

5–6 दिसंबर शिखर सम्मेलन: रूस-भारत के बीच 10 लाख नौकरियों और रक्षा डील पर बड़ा फैसला संभव

5–6 दिसंबर शिखर सम्मेलन: रूस-भारत के बीच 10 लाख नौकरियों और रक्षा डील पर बड़ा फैसला संभव

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की संभावित भारत यात्रा को लेकर तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। हालांकि आधिकारिक तारीखों की घोषणा अभी नहीं हुई है, लेकिन कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार 5-6 दिसंबर को होने वाले 23वें वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन के लिए पुतिन दिल्ली पहुंच सकते हैं। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रोजगार, रक्षा और लड़ाकू विमानों से जुड़े तीन बड़े समझौते होने की संभावना है।

पुतिन इससे पहले 2021 में भारत आए थे। उसके बाद रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हो गया, जिसके चलते न वे भारत आ सके और न ही G-20 सम्मेलन में उपस्थित हो पाए। पुतिन अब तक अपने दोनों कार्यकाल मिलाकर 9 बार भारत यात्रा कर चुके हैं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सात बार रूस जा चुके हैं—जो दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी की मजबूती को दर्शाता है।

यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका ने रूस से तेल खरीद पर भारत पर टैरिफ और जुर्माना लगाया है। दोनों देशों के दबावों के बीच भारत अपने रिश्तों में संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। इस बीच भारत, रूस यात्रा को सफल बनाने के लिए सक्रिय है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी हाल के दिनों में अपने रूसी समकक्षों के साथ लगातार बातचीत कर रहे हैं।

रूस पहले ही घोषणा कर चुका है कि वह अपने औद्योगिक क्षेत्रों में लगभग 10 लाख भारतीय कुशल श्रमिकों की भर्ती करेगा। इसके लिए दोनों देशों के बीच लेबर मोबिलिटी करार का प्रारूप तैयार है, जिसमें आव्रजन, सुरक्षा और श्रमिकों की आवाजाही से जुड़े नियम शामिल होंगे।

रक्षा क्षेत्र में भारत की रूस से अपेक्षाएँ बहुत स्पष्ट हैं। भारत पहले ही रूस से 5 एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीद चुका है, जिनमें से 3 की डिलीवरी हो चुकी है और 2 अभी बाकी हैं। भारत पाँच और एस-400 सिस्टम खरीदने का इच्छुक है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस सिस्टम की प्रभावशीलता साबित हो चुकी है।

दूसरा बड़ा समझौता पाँचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों से जुड़ा हो सकता है। भारत को 114 नए फाइटर जेट्स की तत्काल जरूरत है, और रूस का सुखोई-57 इस आवश्यकता को पूरा करने में सक्षम माना जाता है। शिखर सम्मेलन के दौरान इन विमानों के भारत में सह-उत्पादन पर निर्णय लिया जा सकता है।

इसके अलावा ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, शिक्षा, आपदा प्रबंधन और नई ऊर्जा के क्षेत्र में भी कई अहम करार होने की उम्मीद है। कुछ पुराने समझौतों को नवीनीकृत करने की भी संभावना जताई जा रही है।

पुतिन की यह यात्रा न केवल भारत-रूस संबंधों को नई गति दे सकती है, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और भी मजबूत कर सकती है।

Share This
अगला लेख → डिनर के बाद धोनी बने कोहली के ड्राइवर, रांची में दिखी क्रिके…

टिप्पणी करें

Your email address will not be published. Required fields are marked *

बाज़ार
सेंसेक्स 78,499 -456 (-0.58%)
निफ्टी 24,571 -65 (-0.26%)
मौसम
22°C
Partly Cloudy
💧 93% 💨 5 km/h
Dehradun